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रांची:नरक चतुर्दशी पर आध्यात्मिक कार्यक्रम!संसार को नरक बना देने वाला असुर देह का अभिमान ही नरकासुर है :ब्रम्हकुमारी निर्मला बहन

रांची/झारखंड (डॉ अजय ओझा, वरिष्ठ पत्रकार)11 नवंबर।प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के स्थानीय सेवा केन्द्र चौधरी बगान, हरित भवन के सामने हरमू रोड में नरक चतुर्दशी पर केन्द्र संचालिका राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने अपने प्रवचन में कहा – “धन तेरस” से अगले दिन नरक चतुर्दशी मनाई जाती है। पौराणिक कथा है कि नरकासुर नामक दैत्य ने सौलह हजार कन्याओं को बन्दी बना लिया था। भगवान ने दैत्य को मार कर उन सोलह हजार कन्याओं को मुक्त कराया, उसकी याद में मनाया जाता है ये पर्व। यह कथा भी ईश्वर कर्तब्य की यादगार है। नरकासुर अर्थात् संसार को नरक बना देने वाला असुर देह का अभिमान ही नरकासुर है। काम, क्रोध,
लोभ, मोह ये विकार ही इसकी सेना है। सौलह हजार कल्यायें उन पवित्र आत्माओं का प्रतीक है जो भगवान के गले में माला के रूप में पिरोया जाने योग्य है परंतु अज्ञान के कारण देह अभिमान के चंगुल में फंस जाती है। प्रभु – प्रेमी आत्माओं का करूण पुकार सुन भगवान धरती पर अवतरित होते हैं, ज्ञान- दीप जला कर देह-अभिमान रूपी दैत्य का नाश करते हैं और काम, क्रोध आदि विकारों के बन्दीगृह से आत्मा को मुक्त करते हैं।

*दीपावली पूर्व दिन पर आध्यात्मिक कार्यक्रम*

आलौकिक प्रकाश से सम्पन्न आत्माएँ कभी किसी के मन को पीड़ा नहीं दे सकती है। आज से पाँच हजार वर्ष पूर्व अति सुखकारी समय था व हर दिन खुशियों के दीपक जलते थे। भारतदेश पूर्व की भांति अब फिर से शिरोमणि और जगद्गुरू का स्थान प्राप्त करेगा और इसी भारत देश से ईश्वरीय अध्यात्म की दैदीप्यमान किरणें सम्पूर्ण भू-मण्डल को प्रकाशित करेंगी ये उदगार ब्रह्माकुमारी संस्थान, हरमू रोड,
चौधरी बगान, हरित भवन के सामने रॉची में आयोजित दीपोत्सव समारोह दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन करते हुए राज किशोर जी अभियंता ने अभिव्यक्त किये। कार्यक्रम में विश्वजीत जी. राजकीय अधिकारी ने कहा कि दीपावली में हम दीप जलाकर हमारे जीवन में आंतरिक अंधकार को मिटाकर ज्ञानरूपी प्रकाश की ओर कदम बढ़ाते हैं। दीपावली का यह पावन पर्व किसी न किसी रूप से आध्यात्मिकता से भी संबद्ध है। आध्यात्मिकता के मार्ग पर चल कर ईश्वरीय ज्ञान का प्रकाश ही हमें स्वच्छता और पारदर्शिता लायेगा।
विशिष्ट अतिथि पवन सरावगी, समाजसेवी ने कहा अब इस भारत भूमि को जगमग करने के लिए परम ज्योति निराकार परमात्मा का अवतरण हुआ है। सर्व अनिष्टों से निवृति उनसे योग लगाकर ही हो सकती है।
केन्द्र संचालिका ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने कहा ईश्वरीय ज्ञान से जागृत आत्माओं के सम्पूर्ण प्रकाश में अत्याचार, शोषण व भ्रष्टाचार जैसी काली प्रवृत्तियाँ समाप्त हो जायेगी व विश्व के कोने-कोने में शांति प्रेम व भाईचारे की भावनाएँ जागृत होगी। ईश्वरीय विश्व विद्यालय सम्पूर्ण पवित्रता का ऐसा प्रकाश स्तम्भ है जिसके प्रकाश से हर मानव अपने जीवन का अधकार हटा सकता है। जब मनुष्य माया के शासन से स्वतंत्र हो जाता है, नया सतोयुगी शरीर रूपी वस्त्र धारण कर लेता है तब सतयुग का शुभारंभ होता है
जिसकी खुशी में आज तक लोग दीपक जगाते और मिठाईयों से मुख मीठा करते हैं। प्राकृतिक परिवर्तनों के
बाद प्रकृति पुनः संतुलन को प्राप्त करेगी तथा खास भारत के अन्न-धन के भंडार पुनः भरपूर होकर सच्ची दीपावली इस दुनिया में आएगी। श्री लक्ष्मी श्री नारायण का संयुक्त रूप ही चतुर्भुज महालक्ष्मी है। एक दिन उजाला रखने से तथा जागने से श्री लक्ष्मी जी घर में पधारती हैं तो क्यों न सदा के लिए मन पवित्र रखें जिससे श्री लक्ष्मी स्थायी रूप से इस धरा पर पधारें। वर्तमान समय का मानव धन-वैभव की लिसा में आत्मा के दिव्य तेज को नष्ट कर रहा है या अच्छादित कर रहा है। ज्ञानयोग के बल से आलोकित मानव की उच्च आध्यात्मिक स्थिति से वैभवशाली बन दैवी स्वराज्य की स्थापना करेगा कमल पुष्प रामान अनासक्त वन श्रीलक्ष्मी का आह्वान करने की जगह हग गिट्टी के दीप जलाते रहते हैं इसी कारण समाज की समृद्धि रूपी लक्ष्मी रूठ गयी है। आध्यात्मिक रूप से सशक्त नारी ही वर्तमान की दुर्गा और भविष्य की धन लक्ष्मी है। माया ही नरकासुर है। जिसने श्रीलक्ष्मी को अपने पाश में आवद्ध किया था। तब ही परमात्मा शिव इस कलियुगी सृष्टि में अवतररित हुए तथा विकारों के कारागार में बन्द हुयी मनुष्य आत्माओं को ज्ञान और योग के साधन द्वारा मुक्त कराया है। ब्रह्माकुमारी
संस्थान के लिए दीपावली के दिन का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा इसकी स्थापना सन् 1937 में दीपावली
के दिन ही की गयी थी तथा यहां की मुख्य संचालिका दादी प्रकाशमणि का जन्म भी दीपावली के दिन हुआ
था।
समारोह में काफी संख्या में अध्यात्म प्रेमी उपस्थित थे। सबने एक-एक दीप जलाकर आने वाले समय में भी आत्मदीप जागृत रखने का संकल्प एवं प्रण लिया। वे आसुरी अवगुणों जैसे काम क्रोध एवं लोभ का खाता बन्द कर दैवी गुण को धारण कर नया खाता खोलने की प्रतिज्ञा की। ज्ञातव्य हो कि ईश्वरीय ज्ञान एवं राजयोग का निःशुल्क नियमित प्रवचनमाला व प्रशिक्षण इच्छुकों के लिए प्रतिदिन स्थायी रूप से प्रातः 7 बजे से 9 बजे एवं संध्या 5 बजे से 7 बजे तक चौधरी बगान, हरमू रोड स्थित बयाकुमारी संस्थान में आयोजित रहता है।

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