आरा/भोजपुर 03 नवंबर।त्योहारों का महीना खासकर दीपावली महीना चढ़ते ही बाजारों में खरीदारियों को लेकर भीड़ उमड़ने लगती है कोई घरों की सजावटों की सामग्रियों,महिलाओं के लिए गहने तो कोई धार्मिक रीति रिवाजों के मुताबिक पूजन सामग्रियों की खरीदारियों को करतें नजर आते है।
आजकल एक नया ट्रेंड बाजार में देखने को मिल रहा है जहां महिलाएं अपनी साज सज्जा के अलावा घर में शांति और लक्ष्मी प्राप्ति के लिए दीपावली में लक्ष्मी पूजन में धार्मिक मान्यताओं अनुसार खास रंग और खास किस्म के कपड़ो की साड़ियों की खरीदारी करती नजर आ रही है। ऐसी ही महिलाओं की भीड़ आरा शहर में हर किस्म और हर रस्मो पर पहनने वाली साड़ियों का विशाल संग्रह रखने वाले अशोक भाई साड़ी वाला के प्रतिष्ठानों पर देखने को मिली आपको बताते दे की अशोक भाई साड़ी वाला शहर का एक प्रतिष्ठित एक दाम की विश्वशनीय प्रतिष्ठानो में से एक है जिनकी शहर में दो शाखाएं एक महाराजा हाता में ग्रामीण बैंक के नीचे तो दूसरी न्यू पुलिस लाइन में जगजीवन कॉलेज के समीप स्थित हैं।
प्रतिष्ठान अशोक भाई साड़ी वाला के प्रोपराइटर अशोक कुमार ने महिलाओं की खरीदारी की भीड़ पर बताया की हमारा प्रतिष्ठान लगभग 40 वर्ष पुराना है और हमारे पास मेंस,किड्स वियर सूटिंग सटिंग,लड़कियों के लिए सूट, सलवार के बाजार में आजकल चल रहें नए पुराने ट्रेंड के साथ साथ साड़ियों का विशाल संग्रह है जो ग्राहकों को आकर्षित करता है।

एक दाम विश्वसनीयता का प्रतीक
आजकल ऑनलाइन से ऑफ लाइन तक बड़ी से लेकर छोटी कंपनियों द्वारा दिए जा रहे भारी छूट के बावजूद ग्राहकों का अशोक भाई साड़ी वाला के प्रति रुझान के जवाब में अशोक कुमार ने बताया की इसका कारण हमारी वर्षों से चली आ रही व्यावहारिक और विश्वनीयता की नीति का परिणाम है। हम ग्राहकों को वाजिब एक दाम पर उच्चगुणवत्ता वाली कपड़ो की बिक्री करते है रही भारी छूट तो वो एक छलावा है जिससे समाज के कुछ ग्राहक ही प्रभावित है वही एक ग्राहकों का बड़ा समूह इससे इतर है क्योंकि वो जानते है की जिस परिधान की क़ीमत आम तौर पर 2000 (मानी गई राशि) होती है उसे जिसमे सामान्यत coasting,मार्केटिंग,आदि और मुनाफे के तौर पर कुल मिलाकर ₹600 (अनुमानित) मतलब 1400 से कम पर बेचने पर किसी को भी मुनाफा तो दूर उसको नुकसान झेलना पड़ेगा लेकिन यही परिधान त्यौहारों के अवसरों पर 80% तक की छूट के साथ बेचे जाते हैं और यह जाहिर सी बात है की कोई भी व्यापारी वो छोटा हो या बड़ा नुकसान के लिए या सामाजिक दान के लिए व्यवसाय नही करता है इससे यह साफ पता चलता है की उस परिधान की वास्तविक कीमत से कई गुना बढ़ाकर उसका एमआरपी लगाया जाता है और फिर भारी छूट का प्रलोभन दे मोटी कमाई की जाती है जिससे हमारा प्रतिष्ठान परे है और एक वाजिब मुनाफे के साथ एक दाम पर व्यवसाय करता है।
हर कंपनियों की साड़ियों का विशाल रेंज
अशोक कुमार बताते है की हमारे प्रतिष्ठानों में हर कंपनियों पुरानी से पुरानी और नई सभी की साड़ियों का जिसमे सूती साड़ियों की ब्रांड 1985 की करिश्मा,रतन,आउटलुक,लक्ष्मीपति,विशाल आदि की साड़ियों का है जिसकी उचित दामों पर बिक्री की जाती है।
बढ़ रहा है कांजीवरम साड़ियों के प्रति आकर्षण
अशोक भाई साड़ी वाला के प्रोपराइटर अशोक कुमार ने बताया की कांजीवरम की सिल्क साड़ी, आम तौर पर शहरी भारतीय महिलाओं की पसंद मानी जाती है।शादी और अन्य रीति-रिवाजों में इस परंपरागत कपड़ों के साथ धूमधाम से मनाया जाता है।भारत के कई हिस्सों में कांचीपुरम की सिल्क साड़ी को शादी समारोह में सबसे शानदार माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के साथ साथ स्किन के लिए बेहतर मानी जाने वाली कांजीवरम की साड़ियों के प्रति आजकल महिलाओं का रुझान बढ़ा है खासकर दीपावली में घर की लक्ष्मी बेटी,पत्नी और बहु के लिए पूजन के समय इसे धारण कर पूजन कराने के लिए महिलाओं के अलावा पुरुषो में भी महिलाओं को इस साड़ी को पहनावे के रूप में काफी पसंद किया जा रहा है।
