पटना/बिहार (राकेश मंगल सिन्हा) 28 अक्टूबर। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सहरसा जिले के पंचगछिया ग्राम के भगवती प्रांगण में “कोसी का गांधी” स्वातंत्रयवीर स्व राम बहादुर सिंह और उनके ज्येष्ठ पुत्र प्रखर स्वतंत्रता सेनानी स्व पदमानंद सिंह “ब्रह्मचारी” की आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया। प्रतिमा अनावरण के पश्चात मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्व राम बहादुर सिंह एवं स्व पद्मानंद सिंह “ब्रह्मचारी” की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर अपनी श्रद्धांजलि दी।
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि स्व राम बहादुर सिंह एवं स्व पद्मानंद सिंह “ब्रह्मचारी” की प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम में आने का मौका मिला है। आप सब ने मुझे आमंत्रित किया इसके लिए आप सभी का मैं अभिनंदन करता हूॅ और स्व राम बहादुर सिंह एवं स्व पद्मानंद सिंह “ब्रह्मचारी” के प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूँ। स्व राम बहादुर सिंह पूर्व सांसद आनंद मोहन के दादा जी थे और स्व पद्मानंद सिंह “ब्रह्मचारी” उनके चाचा जी थे। उन्होंने कहा कि पूर्व सांसद आनंद मोहन जी और उनकी पत्नी पूर्व सांसद लवली आनंद जी ने मुझे इस कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया था। इन लोगों से मेरा पुराना पारिवारिक संबंध है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि राम बहादुर बाबू का जन्म 1901 ई में हुआ था और उनकी मृत्यु 1950 ई में हो गई थी। राम बहादुर बाबू स्वामी सहजानंद सरस्वती जी के संपर्क में 1919 ई में आए और अंग्रेजों द्वारा लाए गए काले कानून “राॅलेट एक्ट” का विरोध करते हुए अपनी गिरफ्तारी दी थी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन को सफल बनाने के लिए राम बहादुर बाबू ने 1920 ई में सैकड़ों लोगों के साथ मिलकर कोसी सेवक दल का गठन किया और कोसी क्षेत्र में विदेशी कपड़ों का बहिष्कार किया तथा खादी ग्राम उद्योग की शुरुआत की। 1925 ई में जब गांधी जी बिहार आए थे और पूर्णिया, अररिया, फारबिसगंज आदि जगहों पर गए तो भ्रमण के दौरान राम बहादुर बाबू उनके साथ रहे थे। 1930 ई में उन्होंने गांधी जी के नमक सत्याग्रह आंदोलन में भी भाग लिया। राम बहादुर बाबू ने बापू से प्रेरणा लेकर लोगों को नशा से दूर रहने का आह्वान किया था। मैं यहाँ आप लोगों से भी कहना चाहता हूँ कि बापू की बातों को याद रखें और लोगों को नशा से दूर रहने के लिए प्रेरित करते रहें। वर्ष 1934 में जब बिहार में भूकंप आया था और गांधी जी भूकंप पीड़ितों से मिलने मुंगेर पहुंचे थे तो पंचगछिया ग्राम भी आकर राम बहादुर बाबू से मिले थे क्योंकि इनका घर भी भूकंप में ध्वस्त हो गया था। ऐसी स्थिति में भी राम बहादुर बाबू की धर्मपत्नी कुंती देवी ने अपना धन बापू के समक्ष दान में दिया था ताकि पीड़ितों की मदद की जा सके। 1942 ई में भारत छोड़ो आंदोलन में भी राम बहादुर बापू ने सक्रिय भूमिका निभाई थी।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि राम बहादुर बाबू के पुत्र पद्मानंद सिंह “ब्रह्मचारी” ने भी 1942 ई के भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया था। पद्मानंद सिंह जी का जन्म वर्ष 1921 में और मृत्यु वर्ष 2016 में हुई थी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि राजनीति अपनी जगह है। आनंद मोहन जी से मेरा पारिवारिक संबंध है। इनके घर हम पहले भी आते रहे हैं और इनके माता जी-पिता जी से आशीर्वाद लेते रहे हैं। आज प्रतिमा अनावरण के कार्यक्रम के अवसर पर आकर मुझे खुशी हो रही है। कुछ लोग देश के इतिहास को बदलना चाहते हैं लेकिन हम सबको सचेत रहना है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि सभी लोग नई पीढ़ी को इतिहास के बारे में बताते रहिए और उन्हें महापुरुषों के कार्यों एवं उनके योगदान के बारे में प्रेरित करते रहें। हम आप लोगों की सेवा करते रहेंगे। आप लोगों की समस्या के समाधान के लिए कोशिश करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के इतिहास को भुलाइएगा नहीं और सभी लोग मिलकर देश को आगे बढ़ाते रहिए।
कार्यक्रम के आयोजक फ्रेंड्स ऑफ आनंद के द्वारा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अंग वस्त्र, प्रतीक चिन्ह एवं मखाना की बड़ी माला पहनाकर स्वागत किया गया।
कार्यक्रम को जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, पूर्व सांसद आनंद मोहन, पूर्व सांसद लवली आनंद, विधायक चेतन आनंद, आनन्द मोहन के सुपुत्र अंशुमन आनंद, पूर्व मुखिया चंद्रशेखर ठाकुर, और फ्रेंड्स ऑफ आनंद के प्रदेश अध्यक्ष पूर्णानंद यादव ने भी संबोधित किया।
इस अवसर पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री रत्नेश सादा, विधायक पन्नालाल पटेल, विधायक गुंजेश्वर साह, सहरसा के जदयू जिला अध्यक्ष चंद्रदेव मुखिया, पंचगछिया ग्राम पंचायत के मुखिया रौशन सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि गण, फ्रेंड्स का आनंद के सदस्य गण, कोसी प्रमंडल के आयुक्त मनोज कुमार, कोसी प्रक्षेत्र के पुलिस उप महानिरीक्षक शिवदीप लांडे, सहरसा के जिलाधिकारी वैभव चौधरी, सहरसा के पुलिस अधीक्षक उपेंद्रनाथ वर्मा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति एवं बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित थे।
