
पटना/बिहार 4 अक्टूबर।जीवित्पुत्रिका व्रत पर्व के असमंजस को दूर करने हेतु ज्योतिषाचार्य संतोष पाठक ने पञ्चांग और ज्योतिषशास्त्र का घोर अध्ययन के पश्चात बताया है की सप्तमी विद्द्धा अष्टमी का त्याग करते हुए उदयकालीन अष्टमी में जीवित पुत्रिका पर्व करना शास्त्र सम्मत है।उन्होंने कहा की पञ्चांग का निर्माण ज्योतिष शास्त्र से ही हुआ है जो हमे ग्रहों और नक्षत्रों की दिशा और दशा का बोध कराता है और ज्योतिषीय ज्ञान हमें सही नक्षत्र और ग्रह दशा में किसी भी शुभ कार्य और पर्व त्योहारों को करने का ज्ञान देता है जिसका फलाफल सकारात्मक प्रभाव हमारे जीवन पर प्रभाव डालता है।इस लिहाज से ज्योतिष शास्त्र अनुसार कहा गया है की सप्तमी युक्त अष्टमी करने पर सात जन्म तक सौभाग्य का हानी और पुत्र वियोग बार-बार होता है
जीवित्पुत्रिका व्रत में दंड पल नहीं देखा जाता है सिर्फ सूर्योदय कालीन तिथि देखा जाता है।अगर अष्टमी तिथि कुछ क्षण भी मिलता है तो वही व्रत शुभ फलदायक है।
सकारात्मक फल प्राप्ति हेतु 7 अक्टूबर को व्रत कर 8 अक्टूबर को सूर्य उदय के बाद पारण करना उचित होगा।
