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साहित्य वही है जो हममें बेचैनी पैदा करे! जबलपुर में प्रलेस का राष्ट्रीय अधिवेशन सम्पन्न।

खैरागढ़/छत्तीसगढ़ (रवींद्र पांडेय)। 26 अगस्त। “साहित्य वही है जिसमें सृजन की आत्मा हो, जीवन की सच्चाइयों का प्रकाश हो, जो हममें गति और बेचैनी पैदा करे, सुलाए नहीं क्योंकि अब और ज़्यादा सोना मृत्यु का लक्षण है।“ महान कथाकार प्रेमचंद के ये उद्गार आज भी प्रासंगिक व दिशासूचक हैं और चुनौतीपूर्ण समय में प्रेरणास्पद हैं।
प्रगतिशील लेखक संघ के जबलपुर में हुए राष्ट्रीय अधिवेशन में “जबलपुर प्रस्ताव” पारित करते हुए उक्त बातें कही गईं।
सुप्रसिद्ध साहित्यकार हरिशंकर परसाई की जन्म शताब्दी के अवसर पर उनकी स्मृति को समर्पित अखिल भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ द्वारा 18 वां राष्ट्रीय महाधिवेशन सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर सांगठनिक सत्र में नई कार्यकारिणी घोषित की गई। देश के जाने-माने साहित्यकार पी. लक्ष्मी नारायण (आंध्रप्रदेश) को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। कथाकार व आलोचक विभूतिनारायण राय (उत्तरप्रदेश ) कार्यकारी अध्यक्ष होंगे। पंजाब के डॉ.सुखदेव सिंह सिरसा को फिर से महासचिव चुना गया। छत्तीसगढ़ के साहित्यकार राजेश्वर सक्सेना संरक्षक मंडल के सदस्य होंगे। साथ ही प्रलेसं छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार नथमल शर्मा को राष्ट्रीय प्रलेसं के अध्यक्ष मंडल में सदस्य चुना गया। इसके अलावा लोकबाबू, परमेश्वर वैष्णव, उषा आठले, वेदप्रकाश अग्रवाल और रफीक खान को राष्ट्रीय समिति का सदस्य मनोनीत किया गया। नई कार्यकारिणी की घोषणा संरक्षक राजेन्द्र राजन ने की। संचालन विनीत तिवारी ने किया ।
परसाई जी की प्रख्यात उक्ति “ठिठुरता हुआ गणतंत्र” इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन की थीम रही। सम्मलेन का उद्घाटन प्रसिद्ध चिंतक पद्मश्री सईदा हमीद द्वारा किया गया। इस अवसर पर क्यूबा के राजदूत अलेकजेन्द्रो विशिष्ट अतिथि के रुप में मौजूद थे। साथ ही वरिष्ठ कवि 92 वर्षीय मलय का मंच पर होना बेहद महत्वपूर्ण रहा। संचालन तरुण गुहा नियोगी ने किया। सम्मलेन में देश-विदेश के 500 से अधिक साहित्यकार प्रतिनिधियों ने शिरकत की । प्रगतिशील लेखक संघ सभी भारतीय भाषाओं का एकमात्र लेखक संगठन है अतएव इसमें 23 प्रान्तों के विभिन्न भाषाओं के साहित्यकार भारी तादात में उपस्थित हुए। छत्तीसगढ़ से सबसे अधिक 54 प्रतिनिधि साहित्यकार शामिल हुए। इसमें अभिव्यक्ति के खतरे उठाने होंगे, संविधान की सुरक्षा और संवर्धन की चुनौतियां, हमारे समय में रोशनी की उम्मीद, शोषण के विरुद्ध सांस्कृतिक अभिव्यक्ति, युवाओं लेखकों से संवाद जैसे अनेक गम्भीर विषयों पर विभिन्न वैचारिक सत्रों में विचार व्यक्त किये गए। वैचारिक प्रथम सत्र का संचालन प्रलेसं छत्तीसगढ़ अध्यक्ष नथमल शर्मा ने किया।
इस अवसर पर नवशरण कौर ने बेहद प्रभावी ओजस्वी वक्तव्य दिया। आलोचक वीरेंद्र यादव (लखनऊ ), इप्टा के राष्ट्रीय का. अध्यक्ष राकेश, स्वर्णसिंह विर्क और हरियाणा के प्रो हरभगवान चावला ने आज की चुनौतियों पर अपनी बात रखी। तीन दिन के सम्मलेन में छः सत्र हुए। साथ ही हर सत्र में किताबों का विमोचन हुआ। कार्टूनिस्ट बालेंदु परसाई के कार्टून प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रही। सम्मलेन द्वारा परसाई परिवार का सम्मान किया गया। नगर निगम द्वारा एक सड़क का नाम परसाई मार्ग घोषित करने और परसाई की प्रतिमा लगाने की घोषणा के लिए महापौर को धन्यवाद दिया गया।
सम्मेलन के प्रथम दिन विशाल सांस्कृतिक रैली निकाली गई, जिसमें लोक कलाकारों और देश भर से आये साहित्यकारों के साथ प्रलेसं छत्तीसगढ़ की विभिन्न जिला इकाइयों के साहित्यकार शामिल हुए ।
इस राष्ट्रीय सम्मेलन में खैरागढ़ जिला इकाई के संकल्प पहटिया, यशपाल जंघेल, गिरधर सिंह राजपूत, रवीन्द्र पाण्डेय, रवि यादव, डॉ. देव माइत मिंज, धर्मेंन्द्र वर्मा, महेंद्र कुमार वर्मा आदि सहित्यकारों ने उल्लेखनीय रचनात्मक भागीदारी की।

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