आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा) 22 अगस्त।अभाविप के प्रदेश सह मंत्री राज पाण्डेय ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर वर्तमान में बिहार शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव के.के. पाठक द्वारा आये दिन नए नए फरमान को जारी करना उनके तानशाही रैवैया को दर्शाता है। विश्वविद्यालय कैंपस में अपनी बातों को रखते हुए पाण्डेय ने कहा शिक्षा में सुधार की बात तो ठीक है, सुधार होना भी चाहिए। क्योंकि सही शिक्षा से ही समृद्ध समाज और राष्ट्र की प्रगति संभव है ।लेकिन शिक्षा के नाम पर डराना धमकाना ,किसी का वेतन रोकना, शिक्षकों से अभद्र व्यवहार उचित प्रतीत नहीं होता है। शैक्षणिक माहौल बनाने के लिए शिक्षक, छात्र, अभिभावक, जनप्रतिनिधि, प्रशासन, और विश्वविद्यालय जिसे संवैधानिक रूप से ऑटोनॉमस बॉडी बनाया गया है, सब को विश्वास में लेकर काम करने की जरूरत है। इमरजेंसी की तरह काला अध्याय लिखने का प्रयास न हो।बिहार में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की भी बहुत अच्छी तादाद,अच्छे शिक्षकों का भी बहुत बड़ा तबका युवाओं को भविष्य बनाने में लगा भी है।
वही प्रदेश कार्यसमिति सदस्य छोटू सिंह ने कहा कि अभी वर्तमान में राज्य सरकार और राजभवन को आमने सामने कर के के पाठक ने जिस तरह से पूर्व में बिहार विश्वविद्यालय में नए कुलपति के नियुक्ति के लिए राजभवन द्वारा जारी किये अधिसूचना के बाद बिहार सरकार द्वारा पुनः अधिसूचना निकालना कुलाधिपति के अधिकारों पर अतिक्रमण करने का प्रयास करना है और यह उनके मानसिक दिवालियापन को दर्शाता है।संयोजक चन्दन तिवारी ने कहा कि वीर कुँवर सिंह विश्वविद्यालय और बिहार विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति के वेतन रोकने के नए फरमान से बिहार सरकार बंगाल के तर्ज पर बिहार के विश्वविद्यालयों से कुलाधिपति महोदयों के अधिकारों को समाप्त कर अपनी मनमानी करना चाह रही है।अभाविप ऐसा कतई बर्दाश्त नही करेगी। अगर स्तिथि जल्द सुधार नही हुई तो अभाविप चरणबद्ध आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।

