भोपाल/मध्यप्रदेश 20 जुलाई।भोपाल संक्षिप्त परिदृश्य में सार्थक सन्देश देती हैं लघुकथाएं ,इनका सृजन चिंतन अनुभूति और विचार के स्तर पर तय होता है, एक अच्छी लघुकथा मनुष्यता के बोध को समृद्ध करती है ,यह उदगार हैं वरिष्ठ साहित्यकार कांति शुक्ला ‘उर्मि’ के जो लघुकथा शोध केंद्र समिति द्वारा आयोजित लघुकथा पाठ एवम विमर्श में लघुकथाकार निर्मल कुमार डे के द्वारा प्रस्तुत लघुकथाओं के पश्चात अपने अध्यक्षीय उदबोधन में बोल रही थीं | वरिष्ठ साहित्यकार गोकुल सोनी के सफल संचालन में आरम्भ हुए इस आयोजन में सर्वप्रथम लघुकथा शोध केंद्र के सचिव घनश्याम मैथिल ‘ अमृत’ ने स्वागत उदबोधन दिया, ततपश्चात निर्मल कुमार डे ने ‘बरकत’ मेहनत की कमाई पर केंद्रित ‘पुश्तैनी पेशा ‘ जाति-पांति पर प्रहार करती लघुकथा ‘मेरा धर्म ‘ बढ़ते संकीर्ण साम्प्रदायिकता के ज़हर पर ‘घर’ रूढ़िवादिता को लेकर और ‘बिरादरी ‘ लघुकथाओं का प्रभावी पाठ किया | इन लघुकथाओं पर वरिष्ठ साहित्यकार सुनीता प्रकाश ने अपने विचार रखते हुए इन लघुकथाओं को संस्कार और मानवीय मूल्यों की स्थापना करने वाली बेहतरीन लघुकथाएं निरूपित किया ,उनके अनुसार यह सभी लघुकथाएं समाज में साम्प्रदायिकता के फैलते जहर व जाति-पाँति की संकीर्णता के विरुद्ध संघर्ष का नाद है ,उन्होंने सभी लघुकथाओं को कथ्य व शिल्प की दृष्टि से बेहतर बताया | गोष्ठी में लघुकथा शोध केंद्र की निदेशक कांता रॉय ने अपने विचार रखते हुए गूगल गोष्ठी के माध्यम से वैश्विक स्तर पर लघुकथा के विस्तार की उपलब्धि बताते लघुकथाएं मंच पर साझा करने का अनुरोध किया जिससे अधिक से अधिक लोगों को लघुकथा पाठ का अवसर दिया जा सके |
कार्यक्रम में भारत के विभिन्न प्रांतों से लगभग 86 साहित्यकारों ने अपनी उपस्थिति दी। अमेरिका से चित्रा राघव राणा भी उपस्थित रहीं। तत्पश्चात
प्रश्नोत्तर काल में विभिन्न साहित्यकारों के प्रश्नों का निर्मल कुमार डे ने उत्तर दिया।कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ लघुकथाकार मुज़फ्फर इकबाल सिद्दीकी ने उपस्थित जनों का आभार प्रकट किया।

