कृषि से उद्योग तक का सफर: जिला पदाधिकारी के निरीक्षण में उजागर हुआ बिहार की पहली कॉमर्शियल टिश्यू कल्चर लैब की ताकत।

कम जमीन, ज्यादा मुनाफा: हीक्योर एग्रो प्लांट की टिश्यू कल्चर तकनीक से किसानों के लिए खुल रहा आत्मनिर्भरता का नया द्वार।
RKTV NEWS/मुजफ्फरपुर(बिहार)06 फरवरी।कृषि को परंपरागत ढर्रे से निकालकर आधुनिक, वैज्ञानिक एवं लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करने की दिशा में मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन लगातार ठोस पहल कर रहा है। इसी क्रम में कुढ़नी प्रखंड के खरौना स्थित हीक्योर एग्रो प्लांट प्राइवेट लिमिटेड का जिला पदाधिकारी सुब्रत कुमार सेन द्वारा स्थलीय भ्रमण कर टिश्यू कल्चर प्रयोगशाला का गहन अवलोकन किया गया। इस दौरान उन्होंने प्रयोगशाला में विकसित हो रहे उन्नत, विदेशी एवं गुणकारी पौधों की तकनीक, गुणवत्ता और किसानों को होने वाले लाभ की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
जिला पदाधिकारी ने कहा कि आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक आधारित टिश्यू कल्चर के माध्यम से विकसित पौधे न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होंगे, बल्कि खेती को उद्योग, व्यापार और वाणिज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य केवल कृषि उत्पादन बढ़ाना नहीं है, बल्कि कम लागत में किसानों को अधिक लाभ दिलाकर आत्मनिर्भर बनाना है।
उद्यमिता, निवेश और रोजगार को मिल रहा बढ़ावा
जिला पदाधिकारी ने हीक्योर एग्रो प्लांट जैसे नवाचार आधारित उद्यमों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे संस्थान जिले में निवेश, स्थानीय रोजगार और कृषि आधारित उद्योगों को नई गति प्रदान कर रहे हैं। टिश्यू कल्चर लैब के माध्यम से किसानों को उच्च गुणवत्ता के पौधे स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि परंपरागत खेती से हटकर आधुनिक तकनीक आधारित खेती को प्रोत्साहित करने से किसानों के लिए कृषि को लाभकारी बनाने में मदद मिलेगा। टिश्यू कल्चर इसी दिशा में एक गेम चेंजर टेक्नोलॉजी है, जो सीमित भूमि में भी अधिक उत्पादन और बेहतर गुणवत्ता सुनिश्चित करती है।
फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट से मान्यता प्राप्त लैब
प्लांट के निदेशक अनिल कुमार सिंह ने जिला पदाधिकारी को अवगत कराया कि हीक्योर एग्रो प्लांट प्राइवेट लिमिटेड को फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (FRI) से मान्यता प्राप्त है। वर्तमान में यहां क्रॉम्बिया (क्लोनल यूकेलिप्टस) और नीम का टिश्यू कल्चर के माध्यम से बड़े पैमाने पर पौध उत्पादन किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि टिश्यू कल्चर से विकसित पौधे कम समय में पेड़ का रूप ले लेते हैं, रोग मुक्त होते हैं और उनकी वृद्धि समान होती है, जिससे किसानों को अधिक मुनाफा प्राप्त होता है।
करजा में 30 एकड़ में प्रदर्शन प्लांटेशन, किसानों को मिल रहा प्रत्यक्ष लाभ
प्लांट निदेशक ने बताया कि मरवन प्रखंड के करजा पानापुर क्षेत्र में 30 एकड़ भूमि में प्रदर्शन प्लांटेशन किया गया है। इसका उद्देश्य किसानों को केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें प्रत्यक्ष रूप से पौधों की वृद्धि, उत्पादन क्षमता और आर्थिक लाभ दिखाना है।
यहां किसानों को यह समझाया जा रहा है कि किस प्रकार टिश्यू कल्चर से विकसित पौधों का रोपण कर खेती को एक लाभकारी व्यवसाय में बदला जा सकता है। इस प्रदर्शन क्षेत्र से प्रेरित होकर कई किसानों ने बड़े पैमाने पर आधुनिक खेती को अपनाया है।
10 साल में 1 एकड़ से 1 करोड़ तक की आय
क्रॉम्बिया फसल की जानकारी देते हुए निदेशक ने बताया कि यदि किसान 1 एकड़ भूमि में क्रॉम्बिया की खेती करता है, तो 10 वर्षों में लगभग एक करोड़ रुपये तक का लाभ प्राप्त कर सकता है। यह फसल तेजी से बढ़ती है और लकड़ी उद्योग के लिए अत्यंत उपयोगी मानी जाती है।
इसके अतिरिक्त यहां टर्की, अफगानिस्तान और ईरान के डायना प्रभेद के अंजीर भी टिश्यू कल्चर के माध्यम से विकसित किए जा रहे हैं, जिनकी बाजार में भारी मांग है।
बिहार की पहली कॉमर्शियल टिश्यू कल्चर लैब
लगभग 2 एकड़ में फैली यह विशाल टिश्यू कल्चर प्रयोगशाला बिहार की पहली कॉमर्शियल टिश्यू कल्चर लैब रही है। यह प्रयोगशाला न केवल किसानों की आमदनी बढ़ाने में सहायक है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के सृजन का भी सशक्त माध्यम बन रही है।
यहां पौधों का पल्लवन, पोषण, रोपण एवं संवर्धन वैज्ञानिक तरीके से किया जाता है और तैयार पौधों को किसानों /नर्सरी को उपलब्ध कराया जाता है।
एक स्टेम सेल से सैकड़ों पौधे
टिश्यू कल्चर तकनीक की विशेषता बताते हुए बताया गया कि एक स्टेम सेल से सैकड़ों पौधे तैयार किए जाते हैं। पौधों के जीवन चक्र के लिए आवश्यक हार्मोन, विटामिन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटेशियम, आयरन जैसे तत्वों को जेल के रूप में पोषण पौधों को दिया जाता है, जिससे उनकी वृद्धि तेज और संतुलित होती है।
सैकड़ों उन्नत प्रजातियों का उत्पादन
इस लैब में सीडलेस नींबू, मालभोग केला, बतीसा केला, अनार, सागवान, ईख, बैंबू, सेव, चिकू, आलूबुखारा, कोकोआ, रूद्राक्ष, गम्हार, मौसमी, आंवला, स्ट्रॉबेरी, ग्वाभा, एवोकाडो सहित कई फसलों और फूलों की उन्नत प्रजातियां विकसित की जा रही हैं।
इन पौधों की खासियत यह है कि इनमें पारंपरिक खेती की तुलना में कम लागत, कम समय और अधिक आमदनी संभव है।
अन्य राज्यों तक हो रही आपूर्ति
यहां विकसित पौधों की आपूर्ति महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों में भी की जा रही है। प्रयोगशाला के माध्यम से न केवल मुजफ्फरपुर बल्कि संपूर्ण बिहार के किसानों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
किसानों के लिए प्रेरणा का केंद्र
कई ऐसे किसान हैं जिन्होंने इस संस्थान से प्रेरणा लेकर सीडलेस नींबू की खेती शुरू की है और मात्र 6 महीने में पौधों की संख्या एवं गुणवत्ता में कई गुना बेहतर परिणाम प्राप्त किए हैं। इससे किसानों का आत्मविश्वास बढ़ा है और वे आधुनिक खेती की ओर तेजी से अग्रसर हो रहे हैं।
निर्यात से लेकर घरेलू बाजार तक
यहां तैयार मोरिंगा, नीम का पाउडर रोमानिया और मालदोव जैसे देशों में निर्यात किया जाता है। वहीं सागवान, सीडलेस नींबू, अंजीर, बैंबू आदि पौधे बिहार से बाहर अन्य राज्यों में भेजे जाते हैं। घरेलू बाजार के लिए केला, नींबू जैसे उत्पाद बिहार में ही उपयोग किए जा रहे हैं।
भविष्य की योजनाएं
भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए प्लांट निदेशक ने बताया कि नीम और क्रॉम्बिया के उत्पादन को और अधिक विकसित कर किसानों को उन्नति के रास्ते पर लाने का प्रयास जारी है। लक्ष्य यह है कि खेती को केवल आजीविका नहीं, बल्कि स्थायी और लाभकारी व्यवसाय के रूप में स्थापित किया जाए।
कृषि में बदलाव की नई बयार
यह टिश्यू कल्चर लैब कृषि क्षेत्र में किसी नई क्रांति से कम नहीं है। उम्मीद है कि यह बदलाव की वह बयार है, जो किसानों के जीवन में खुशहाली, संपन्नता और आत्मनिर्भरता का संचार करेगी तथा बिहार को आधुनिक कृषि के मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाएगी।
किस प्रकार किसानों के लिए फायदेमंद
कुढ़नी प्रखंड के खरौना स्थित हीक्योर एग्रो प्लांट प्राइवेट लिमिटेड की टिश्यू कल्चर प्रयोगशाला का स्थलीय निरीक्षण मुजफ्फरपुर जिले में कृषि के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह प्रयोगशाला न केवल किसानों को उन्नत, रोगमुक्त एवं उच्च गुणवत्ता वाले पौधे उपलब्ध करा रही है, बल्कि खेती को पारंपरिक आजीविका से आगे बढ़ाकर एक वैज्ञानिक, लाभकारी और टिकाऊ व्यवसाय के रूप में स्थापित करने में सहायक सिद्ध हो रही है।
जिलाधिकारी ने अवलोकन के दौरान कहा कि टिश्यू कल्चर जैसी आधुनिक तकनीक किसानों की आय बढ़ाने, उत्पादन लागत घटाने और सीमित भूमि में अधिक उत्पादन प्राप्त करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिला प्रशासन का लक्ष्य केवल फसल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों को आत्मनिर्भर बनाते हुए कृषि को उद्योग, व्यापार और वाणिज्य से जोड़ना है।
हीक्योर एग्रो प्लांट जैसे नवाचार आधारित उद्यम जिले में निवेश, स्थानीय रोजगार और कृषि आधारित उद्योगों को नई दिशा दे रहे हैं। स्थानीय स्तर पर उच्च गुणवत्ता के पौधों की उपलब्धता से किसान कम समय व कम लागत लगाकर अधिक लाभ अर्जित कर रहे हैं। 30 एकड़ में विकसित प्रदर्शन प्लांटेशन किसानों के लिए प्रत्यक्ष सीख का माध्यम है, जिससे वे आधुनिक तकनीक के वास्तविक लाभों को देख और समझ पा रहे हैं।
जिलाधिकारी ने उद्यमियों को आश्वस्त किया है कि जिला प्रशासन ऐसी तकनीकी एवं वैज्ञानिक पहलों को हर संभव सहयोग देगा, ताकि अधिक से अधिक किसान आधुनिक खेती को अपनाएं।
इस प्रकार टिश्यू कल्चर तकनीक कृषि में बदलाव की नई बयार है, जो किसानों के जीवन में समृद्धि, स्थिर आय और आत्मविश्वास लाने के साथ-साथ बिहार को आधुनिक कृषि के मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाएगी।

