
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)23 अगस्त। भोजपुर जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के तत्वावधान में सम्मेलन के अपना सभागार में संत शिरोमणि गोस्वामी तुलसीदास की जयंती मनाई गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. बलिराज ठाकुर ने की।अध्यक्षीय संबोधन में प्रो ठाकुर ने कहा कि तुलसीदास के पास मानवतामूलक समाज-दर्शन की दृष्टि थी। उनका काव्य दुर्बल समाज को जागरण का संदेश देता है। उनकी दृष्टि में परोपकार से बढ़कर कोई दूसरा धर्म नहीं है।उनका साहित्य आज भी विश्व के लिए मार्गदर्शक बना हुआ है।
सम्मेलन के प्रधानमंत्री डॉ. नंदजी दूबे ने तुलसीदास को विश्व कल्याण का उन्नायक बताते हुए कहा कि उनका रामचरित कभी अप्रासंगिक नहीं हो सकता।प्रो डॉ. महेश सिंह ने मानस में वर्णित चार मनोहर घाटों का विश्लेषण करते हुए मानस-दर्शन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राम-नाम सुंदर करतल-ध्वनि है, जिससे संशय के विहग भाग जाते हैं।प्रो.नथुनी सिंह ने कहा कि रामचरितमानस जैसा दूसरा महाकाव्य विश्व साहित्य में मिलना कठिन है। डॉ. अयोध्या प्रसाद उपाध्याय ने तुलसीदास द्वारा रचित विभिन्न ग्रंथों का विश्लेषण किया। प्रो. दिवाकर पांडेय ने तुलसी साहित्य को अनुपम बताया।
राकेश कुमार मिश्र ने तुलसीदास का भजन प्रस्तुत किया। समाजसेवी शिवदास सिंह ने मानस का सस्वर पाठ किया। जनमेजय ओझा, केशव ठाकुर और रमेश प्रपन्न ने काव्य पाठ किया।


