भिखारी ठाकुर सामाजिक शोध संस्थान के बैनर तले आयोजित हुई श्रद्धांजलि सभा।

केंद्र व राज्य सरकार द्वारा भोजपुरी की उपेक्षा पर जताई गई चिंता।

भिखारी ठाकुर को भारत रत्न देने की एक स्वर से उठी मांग।

पांडवानी गायिका पद्मविभूषण तीजन बाई के निधन पर अर्पित की गई श्रद्धांजलि।
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा) 10 जुलाई। आज स्थानीय सरदार पटेल बस पड़ाव परिसर में भिखारी ठाकुर सामाजिक शोध संस्थान, आरा द्वारा भोजपुरी भाषा के शेक्सपीयर, राय बहादुर भिखारी ठाकुर की पुण्यतिथि के अवसर पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता रंगकर्मी प्रीति कुमारी ने और मंच संचालन भिखारी ठाकुर सामाजिक शोध संस्थान के अध्यक्ष, वरिष्ठ पत्रकार नरेन्द्र सिंह ने किया।
श्रद्धांजलि सभा में भिखारी ठाकुर के साथ – साथ पंडवानी की अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त गायिका पद्मविभूषण तीजन बाई को भी श्रद्धांजलि दी गई।
श्रद्धांजलि सभा में अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए भोजपुरी भाषा के शोधार्थी, युवा कवि रवि प्रकाश सूरज ने कहा कि भिखारी ठाकुर के तरह ही तीजन बाई ने भी लोक कला और लोक भाषा को अपना हथियार बनाया।
उन्होंने कहा कि भोजपुरिया समाज से आग्रह है कि आने वाले जनगणना में अपनी मातृभाषा भोजपुरी ही लिखवाएं।
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए वरिष्ठ रंगकर्मी, नाटककार और निर्देशक कृष्ण यादव ” कृष्णेंदु ” ने भिखारी ठाकुर के लिए ” भारत रत्न सम्मान ” से सम्मानित करने की मांग किया।
कृष्णेंदु ने कहा कि भिखारी ठाकुर ने तत्कालीन सामाजिक विकृतियों के विरुद्ध अपने रचनाओं को खड़ा किया।
राष्ट्रीय भोजपुरी संस्थान, के बिहार प्रदेश अध्यक्ष डॉ शीलभद्र ने कहा कि भोजपुरिया समाज को अपनी भाषा की संवैधानिक मान्यता के लिए आन्दोलन करना चाहिए।
वरिष्ठ रंगकर्मी संजय पाल ने गबर – घिचोर नाटक की चर्चा करते हुए कहा कि भिखारी ठाकुर ने इस नाट्य के माध्यम से मां के ममत्व को चिह्नित किया है।
अभिनेता और सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर ओम प्रकाश कश्यप ने भिखारी ठाकुर को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि हमें उनकी रचनाओं को सुरक्षित और संग्रहित करना होगा।
भोजपुरिया जन मोर्चा के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद सिंह ने मलिक जी को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि भोजपुरिया समाज के साथ केन्द्र और राज्य सरकार सौतेला व्यवहार कर रहा है। केन्द्र सरकार तो भोजपुरी भाषा को संवैधानिक मान्यता नहीं दे रही है लेकिन राज्य सरकार भी राज्य में भोजपुरी भाषा को राज्य भाषा की दर्जा नहीं दे रही है।
विनोद सिंह ने कहा कि भोजपुरिया को केन्द्र सरकार के साथ ही साथ राज्य सरकार के विरुद्ध भी आन्दोलन करना चाहिए।
मंच संचालन करते हुए भिखारी ठाकुर सामाजिक शोध संस्थान के अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार नरेन्द्र सिंह ने कहा कि इस वर्ष संस्थान के स्थापना का 25वां वर्ष है इसलिए मैं चाहता हूँ कि भिखारी ठाकुर जयंती के अवसर पर इस बार वृहद कार्यक्रम किया जाए। जिसकी तैयारी अभी से शुरू कर दिया गया है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रीति कुमारी ने कहा कि हमलोग कई तरह के नाटक करते हैं लेकिन भिखारी ठाकुर जी के नाटकों को करने में एक अलग तरह की अनुभूति होती है।
श्रद्धांजलि सभा में वरिष्ठ रंगकर्मी सरफराज अहमद, डॉ किरण कुमारी, पत्रकार विजय कुमार सिंह, कवि राज कवि, वरिष्ठ रंगकर्मी अनिल प्रतीक्षा, अमिताभ कुमार, वरिष्ठ रंगकर्मी अम्बुज कुमार, सुमन कुमार सिंह, कृष्ण प्रताप सिंह, कुशल कान्ति, डॉ अनिल कुमार सिंह, स्वामी विक्रमादित्य, प्राकृतिक चिकित्सक नंदकिशोर राम, सन्नी कुमार, राष्ट्रीय भोजपुरी संस्थान के सचिव सुरेश भोजपुरी इत्यादि साहित्यकार, पत्रकार, चित्रकार और रंगकर्मी उपस्थित थे।
कार्यक्रम के अन्त में पांडवानी गायिका पद्मविभूषण तीजन बाई के चित्र पर फूल माला अर्पित किया गया और दो मिनट का मौन रख कर पद्मविभूषण तीजन बाई को सामूहिक रूप से श्रद्धांजलि अर्पित किया गया।

