
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)02 जून।भोजपुर जिले के बखोरापुर स्थित मां काली मंदिर परिसर में आयोजित राष्ट्रीय स्थापना दिवस एवं अनावरण समारोह का भव्य समापन हुआ। इस अवसर पर बिहार सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री, जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता तथा हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं और ग्रामीणों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक बना दिया।समारोह के दौरान धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा-अर्चना एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। मां काली के प्रति श्रद्धा और आस्था से ओत-प्रोत वातावरण में भक्तों ने पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं शांति की कामना की। वहीं मंच से आए अतिथियों ने बखोरापुर की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम का सबसे आकर्षक केंद्र पूर्वांचल की प्रसिद्ध फरुवाही लोकनृत्य प्रस्तुति रही। आधुनिक दौर में जहां अधिकांश सांस्कृतिक आयोजनों में अश्लील और फूहड़ गीतों का बोलबाला देखने को मिलता है, वहीं फरुवाही नृत्य ने लोक संस्कृति की गरिमा और परंपरा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। कलाकारों ने अपने पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीतों और नृत्य शैली के माध्यम से पूर्वांचल की सांस्कृतिक विरासत को मंच पर उतार दिया।
फरुवाही नृत्य की प्रस्तुति ने दर्शकों को इतना प्रभावित किया कि देर रात तक लोग कार्यक्रम स्थल पर डटे रहे। ढोल, मंजीरा और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर धुनों पर प्रस्तुत लोकनृत्य ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। बुजुर्गों से लेकर युवाओं और महिलाओं तक सभी ने इस सांस्कृतिक कार्यक्रम का भरपूर आनंद लिया।
स्थानीय लोगों का कहना था कि ऐसे आयोजन केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं होते, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपरा और लोककलाओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य भी करते हैं। फरुवाही नृत्य की प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि यदि समाज अपनी लोक संस्कृति को संरक्षण और प्रोत्साहन दे, तो हमारी सांस्कृतिक पहचान आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रह सकती है।
समारोह के सफल आयोजन को लेकर आयोजकों ने सभी अतिथियों, कलाकारों, श्रद्धालुओं एवं क्षेत्रवासियों के प्रति आभार व्यक्त किया। धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम बना यह आयोजन क्षेत्र के लोगों के लिए लंबे समय तक यादगार बना रहेगा।
