एगो आउर दुर्गा
लागल कारगिल में लड़इआ, चलऽ लड़े सजना, गोलिया, बारूद ढोके सीमा पहुँचाइब सजना।
उड़ी आसमानवा विमानवा में जइहऽ तुहूँ, उपरे से दुश्मन के झोंझ बीच, बमवा गिरइहऽ संजना।
तोपवा बारूद मारी, भूमि प सुतइह उनका,
हम त बनि के नगिनिया उनका डॅसब सजाना।
बाबा सूबेदार मेजर, भइया कर्नलवा, हम तुहूँ मिलब, बनी, भारी पलटनवा सजना।
खाँचल डॅरार, सुझ शिमला भूलइहनत, घाटिये में घेटी उनकर, दबाइब सजना।
छछनस वाशिंगटन जाके, चाहे ऊ पेकिंगवा,
बइठल दिल्ली से शराफत उनका पढ़ाइब सजना कथा के अभिमन्यु नाहीं,
कथा करतब के अव होईहें, कथा करतब एके वे सिखावे, रणवा जाइब सजना।
द्रास, बटालिक, कारगिल तक ही हम ना जनली,
सकाडू साथे पूरा काश्मिर भी हमरे हउवे, बुझाइल सजना।
चूड़ीवाला इ हाथन में, चौकी बेलना तक ना रहिहें,
खून पियासल दुश्मनवा के, ई हाथन तलवार धराइल सजना।
हम हई हरदेव की मुन्निया, हम हई गणेश के रनिया,
हम हई मनोज की बिटिया, हम हई योगेन्द्र की बहना,
हम हई विक्रम की ललना, हम हई संजय की संगना ।
जानीला हम, दुश्मन के मूली अस चबावे के,
हम मथनी से माथा फोड़े जानीला, हम भूत भगावे जानीला,
हम पैंसठ दुहरावे जानीला,
हम एकहत्तर अस पाठ पढ़ावे
जानीला,
देबे सम्मान शहीदन के, गाँव के गाँव जगाई सजना।
बान्हें राखी भइया के हाथन, कारगिल में जाइब, तिरंगा टाइगर हिल फहरावे, हमहूँ जाइब सजना।


