सुअरों को अपने घरों से दूर रखें, क्योंकि सूअर जापानीज इंसेफेलाइटिस को फैलाने में सहायक होते हैं।

मच्छर छोटी बीमारी नहीं, बल्कि बड़ी बीमारियों का कारण है।

जापानी इंसेफेलाइटिस फैलाने वाली मच्छर क्यूलेक्स ट्रिटेनिओरहिन्कस, क्यूलेक्स विश्नोई प्रायः तालाबों एवं धान के खेतों में जमें हुए पानी में पनपते हैं, बचाव हेतु नीम के सूखें पत्ते या जला हुआ मोबील डालें।
RKTV NEWS/देवघर (झारखंड)22 मई।राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NVBDCP), देवघर द्वारा सदर अस्पताल सभागार, देवघर में जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) एवं एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) विषय पर जिला स्तरीय एक दिवसीय रिओरिएंटेशन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रमेश कुमार द्वारा की गई। अपने संबोधन में उन्होंने जेई/एईएस जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव, समय पर पहचान एवं जागरूकता की आवश्यकता पर विस्तृत जानकारी दी। साथी जानकारी दी गई की जापानी इट्स फैसेलिटीज वैसे क्षेत्र में होता है, जहां पशु, पक्षी एवं मानव साथ-साथ रहते हैं। संक्रमित सूअर जापानी इंसेफेलाइटिस को फैलाने में मुख्य भूमिका निभाते हैं।
जिला भीबीडी पदाधिकारी डॉ अभय कुमार यादव ने कहा कि यह बीमारी एक से 15 साल तक के बच्चों को ज्यादा होने की संभावनाएं रहती है। साथ ही यह बीमारी 250 लोगों में से केवल एक को भी होने की संभावना रहती है, जिसमें से 30% लोगों में शारीरिक अथवा मानसिक रूप से विकलांगता आ सकती है। विश्व भर में अभी 50000 इस बीमारी के चपेट में आए हैं जिसमें से 15000 लोगों की मौत होने की सूचना हैं तथा शेष में से भी 80-90% लोगों में मानसिक अथवा शारीरिक रूप से विकलांगता की भी शिकायतें पाई गई है। यह बीमारी बहुत ही खतरनाक एवं वायरस से होने वाली बीमारी है जिसे “मस्तिष्क ज्वर” के नाम से भी जाना जाता है।
लक्षण
जापानी इंसेफेलाइटिस में तेज सिरदर्द, तेज बुखार, बेहोशी, कंपन्न, उल्टी आना, मिर्गी के लक्षण दिखना तथा शारीरिक क्रियाओं में समन्वय का अभाव होना है। ऐसे लक्षण के रोगी दिखाई देने पर तुरंत उसे नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र अथवा अस्पताल में त्वरित जांच व इलाज हेतु भेजने की अपील किया गया, अन्यथा रोगी की जान भी जा सकती है।
प्रशिक्षण के दौरान डॉ. शब्दकांत मिश्रा द्वारा जेई एवं एईएस बीमारी के लक्षण, बचाव, उपचार एवं रोकथाम से संबंधित विस्तृत जानकारी प्रतिभागियों के साथ पीपीटी के माध्यम से साझा की गई। उन्होंने बताया कि समय पर पहचान एवं उचित इलाज से इस बीमारी के गंभीर प्रभावों को कम किया जा सकता है।
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण विभाग से डॉ. गणेश कुमार यादव, जिला भीबीडी सलाहकार, देवघर द्वारा कार्यक्रम के संचालन, जापानीज इंसेफेलाइटिस को प्रसारित करने वाली मादा क्यूलेक्स मच्छरों के प्रकार, प्रजनन स्थल, रिजर्वायर नेचुरल होस्ट हेरॉन्स/पंछी (माइड्रेटेड बर्ड), एम्पलिफाइंग होस्ट (सुअर), एक्सीडेंटल होस्ट (मनुष्य) के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। इसके रोकथाम हेतु समुदाय में प्रचार-प्रसार, रोगी खोज गतिविधियों, सर्विलांस एवं रिपोर्टिंग प्रणाली की भी विस्तृत जानकारी पीपीटी के माध्यम से दी गई। साथ ही उन्होंने सभी स्वास्थ्य कर्मियों को जेई/एईएस से संबंधित रिपोर्टिंग प्रक्रिया एवं फील्ड स्तर पर किए जाने वाले कार्यों के बारे में विस्तार से अवगत कराया।
डॉ मनीष शेखर, जिला एपीडेमियोलॉजिस्ट – आईडीएसपी के द्वारा पोर्टल इस बीमारी से प्रभावित या संभावित रोगियों को ऑनलाइन करने की प्रक्रिया की पूर्ण जनकारी दी गई।
कार्यक्रम में सिविल सर्जन डॉ रमेश कुमार, जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. अभय कुमार यादव, उपाधीक्षक – डॉ. सुष्मा वर्मा, चिकित्सा पदाधिकारी डॉ शब्दकांत मिश्रा, जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण सलाहकार डॉ. गणेश कुमार यादव, जिला एपीडेमियोलॉजिस्ट- आईडीएसपी डॉ मनीष शेखर सहित जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों से एमटीएस, एसआई, एसडब्ल्यू, एमपीडब्ल्यू, बीटीटी, एएनएम, सहिया साथी एवं सहिया दीदी सहित कुल 54 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में भीबीडी कार्यालय से रवि सिन्हा, एफएलए, डीईओ कांग्रेस मंडल, एमपीडब्ल्यू राकेश कुमार तथा अन्य कर्मियों के साथ पिरामल फाउंडेशन से जिला प्रोग्राम लीड श्री अभिषेक कात्यायन की भी सहभागिता रही।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य जेई एवं एईएस जैसी गंभीर एवं मच्छर जनित बीमारियों के प्रति स्वास्थ्य कर्मियों की क्षमता वृद्धि करना तथा समुदाय स्तर पर जागरूकता, रोगी खोज एवं रोकथाम गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाना था।
चेतावनी
लक्षण दिखाई देने पर निम्नलिखित बातों पर ध्यान देने पर विशेष बल दिया गया कि-*
1. बच्चों को कंबल या गर्म कपड़ों में ना लपेटें।
2. बच्चों की गर्दन झुकी हुई ना रखें।
3. बच्चों के नाक बंद नहीं करें।
4. बेहोशी अथवा मिर्गी की अवस्था में बच्चों के मुंह में कुछ भी ना दें।
5. इलाज में ओझा-गुणी में समय नष्ट नहीं करें।
6. तुरंत नजदीकी अस्पताल या चिकित्सक से संपर्क करें।
7. सुअरों को अपने घरों से दूर रखें।
8. विशेष स्वास्थ्य सलाह अथवा जानकारी के लिए मेडिकल हेल्पलाइन टोल फ्री नंबर 104 डायल करें, आकस्मिक स्थिति में किसी भी मरीज को एंबुलेंस द्वारा स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचने के लिए 108 डायल करें तथा आयुष्मान भारत योजना से संबंधित जानकारी के लिए टोल फ्री नंबर 18003456540 पर संपर्क कर जानकारी लिया जा सकता है।
जिला प्रशासन देवघर ने सभी देवघर जिला वासियों से अपील की है कि स्वच्छता को अपनी दिनचर्या में शामिल करें तथा जापानीज इंसेफेलाइटिस मुक्त समाज निर्माण में सहयोग करें। मच्छर छोटी बीमारी नहीं, बल्कि बड़ी बीमारियों का कारण है। इसलिए मच्छरों से बचें, सावधानी अपनाएं और स्वस्थ रहें।

