
आरा/भोजपुर(डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)19 मई।पुरुषोत्तम मास के अवसर पर श्री सनातन शक्ति पीठ संस्थानम् द्वारा श्रीसहदेव गिरि मंदिर कतिरा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के प्रथम दिन प्रवचन करते हुए श्रीमत्सनातनशक्तिपीठाध्यक्ष आचार्य (डॉ) भारतभूषण जी महाराज ने कहा कि अकृतार्थ प्राणियों को कृतार्थ करने के लिए भगवान ने सृष्टि की है।संसार वस्तुतः भगवान के भजन, उनकी प्राप्ति अथवा प्रपत्ति के लिए ही है। सनकादि आचार्य, देवर्षि नारद, भगवान शुकदेव, गोकर्ण जी आदि सभी आचार्यचरणों ने श्रीमद्भागवत के माध्यम से भगवत्प्राप्ति का सुगम मार्ग प्रशस्त किया है।कथा से भक्ति, ज्ञान और वैराग्यादि सानन्द हमारे हृदय में प्रविष्ट हो जाते हैं।हृदय में भक्ति के प्रवेश करते ही भगवान निजलोक को छोड़कर उस भक्त के हृदय में विराजमान हो जाते हैं। आचार्य ने कहा कि भक्ति से ही हमारा उत्कर्ष संभव है।सात दिनों तक मनोयोग से कथा श्रवण कर धुंधुकारी ने प्रेतत्व को देवत्व में परिणत करा लिया।कथा हमारे दुर्गुणों, दुर्व्यसनों को दूर कर जीवन को निर्मल, निर्विकार और भगवत्प्राप्ति के योग्य बनाती है।आचार्य ने कहा कि अधिक मास में काम्य कर्म वर्जित हैं।यह मास भगवान की एकमेव आराधना के लिए ही है।इसमें अधिक-से-अधिक भगवान की सेवा सुनिश्चित करनी चाहिए। इस अवसर पर पुजारी अजय कुमार मिश्र, पं मधेश्वर नाथ पांडेय, जनार्दन मिश्र, रविरंजन सिंह आदि ने श्रोताओं का स्वागत व प्रसाद-वितरण किया।
