प्रणय प्रवाह !
आ तुमको, बाहों में भर लूँ; भर लो, फिर तो मेरी गोद भर जायेगी; आ तुमको पलकों में छुपा हूँ, छुपा लो, फिर तो चंचल नयना, बस झुकी-झुकी रह जायेगी।
आ तेरी मादक गंधों को, जी भरकर आज मैं पीलूँ, पी लो, फिर तो भौंरा क्या एक माली ही मिल जायेगा; आ तेरी होठों पर, होठ आज मैं रख लूँ, रख लो।फिर तो यौवन का कुछ प्यास आज मिट जायेगा।
आ तेरी, उभरे उरजों को, कर प्याला बना छुपा लूँ, छुपा लो, फिर तो ओसों के हर कम्पन से, यह कलि बची रह जायेगी; आ तुमको मैं नदी किनारे, संध्या में सैर करा दूँ, करा दो, फिर तो, कल-कल धारा से, प्रीत का गीत उभर जायेगा।
आ चंदा की चाँदनी में, आज तुम्हें नहला दूँ, नहला दो; फिर तो, अंतः तरल, स्निग्ध बन जायेगी।
आ निस्तब्ध निशा में, कुंज बीच, कौतुहल तुम्हें दिखा दूँ, दिखा दो, फिर तो एक मिला जुला प्रतिबिम्ब उभर आ जायेगा।
आ सरिता के साक्षी में, सिन्दूर माँग में भर दूँ, भर दो, फिर तो बैठ चलेंगे प्रणय नाव पर, जो सागर तक जायेगा। आ झंझावात झकोंरो से, लड़ना तुम्हें सीखा दूँ, सीखा दो,
फिर तो झंझावात को रौदेंगे, लाज तिमीर को आयेगी।
आ तुमको बाँहों में भर लूँ, भर लो,
फिर तो मेरी गोद भर जायेगी।

(उक्त कविता ख्यातिप्राप्त लेखक,कवि,व्यंग्यकार,समीक्षक, अनुवादक “डॉ कृष्ण दयाल सिंह”जो एक अवकाश प्राप्त डाक सेवा अधिकारी भी है, उनके साहित्य काल के शुरूआती दौर में 09 फरवरी 1998 को प्रकाशित की गई कविता संग्रह पुस्तक “यत्र-तत्र”से ली गई है और यह कवि की उक्त संग्रह की अठाईसवी रचना है। RKTV NEWS नित्य इनके संग्रहित पुस्तक से क्रमवार एक एक रचना प्रकाशित करेगी। इनकी कई रचनाएं विभिन्न पत्र पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में प्रकाशित होती रहती है साथ ही इनके दर्जनों पुस्तक भी प्रकाशित हो चुके है, वर्तमान में बिहार राज्य के भोजपुर जिला अंतर्गत आरा के वशिष्ठपुरी में निवास करते है। सुझाव और संपर्क हेतु: 9570805395)

