
आमने-सामने!
पढ़े फारसी बेंचे तेल, आओ देखे उनका खेल; आपस में नहीं उनका मेल, नित दिन करते ठेलम-ठेल ।
एक कहे कि शोला मैं हूँ, एक कहे कि अंगारा; मेरा तेल बिकेगा महँगा, बस घर एक का दूसरे ने जारा।
नभ से बारूद उड़ेलेंगे, पानी में आग लगायेंगे; और व्योम में बस हम, बाणों से बाण लड़ायेंगे ।
हम माफी तक मँगवा देंगे, हम अंतिम सबक सिखा देंगे; हम ऊपर से बम गिरा देंगे, हम पानी में आग लगा देंगे।
हम एक नहीं कुल दो कम बीस,
और हम तो है बीसों में बीस; हम है पक्के हवाबाज, पर हम धरती पर तो देंगे पीस ।
झुका देंगे, दिखा देंगे, युद्ध में धर्म को बिछा देंगे;
हम नक्शे से नाम मिटा देंगे, हम महाशक्ति का नाम मिटा देंगे।
हम कोसों अंदर घुस जायेंगे, हम बंकर में आग लगा देंगे; नभ पर तो अधिकार हमारा, सरजमी पर तुम्हें सिखा देंगे।
मैं व्यापारी आयुध का, और मैं हूँ तेल का सौदागर; क्यों मानू मैं बात किसी की, भरा हुआ जो धन का गागर।
प्रस्ताव शांति का एक तरफ, उन्माद युद्ध का एक तरफ; और शांति के तुमुल शोर में, ठंडा पड़ा युद्ध का जोर।
अब तो नाके बंदी करेंगे, भूखों तक तड़पायेंगे; तेरे बारूद के ढेरों में, तुमसे ही चिनगारी तक लगवायेंगे।
माना शांति के शर्तों को, अब शर्तों पर शर्त लगाओ ना; अभिमान भरे के बल पर, शांति सभा को, अब और अधिक लजवाओ ना ।

(उक्त कविता ख्यातिप्राप्त लेखक,कवि,व्यंग्यकार,समीक्षक, अनुवादक “डॉ कृष्ण दयाल सिंह”जो एक अवकाश प्राप्त डाक सेवा अधिकारी भी है, उनके साहित्य काल के शुरूआती दौर में 09 फरवरी 1998 को प्रकाशित की गई कविता संग्रह पुस्तक “यत्र-तत्र”से ली गई है और यह कवि की उक्त संग्रह की बाईसवीं रचना है। RKTV NEWS नित्य इनके संग्रहित पुस्तक से क्रमवार एक एक रचना प्रकाशित करेगी। इनकी कई रचनाएं विभिन्न पत्र पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में प्रकाशित होती रहती है साथ ही इनके दर्जनों पुस्तक भी प्रकाशित हो चुके है, वर्तमान में बिहार राज्य के भोजपुर जिला अंतर्गत आरा के वशिष्ठपुरी में निवास करते है। सुझाव और संपर्क हेतु: 9570805395)
