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पटना:बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा हीट वेव प्रबंधन हेतु अंतर-विभागीय समीक्षा बैठक आयोजित।

RKTV NEWS/पटना(बिहार )01 अप्रैल। बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा राज्य में संभावित लू (हीट वेव) की चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटने हेतु एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक उपाध्यक्ष डॉ. उदयकांत की अध्यक्षता में तथा सदस्य पी.एन. राय एवं कौशल किशोर मिश्र के मार्गदर्शन में की गई। इस अवसर पर प्राधिकरण के सचिव मो. वारिस खान सहित विभिन्न हितधारक विभागों के वरीय पदाधिकारी एवं प्राधिकरण के अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में स्वास्थ्य, कृषि, जल संसाधन, पेयजल, आपदा प्रबंधन, अग्निशमन, पंचायत, पशुपालन सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक का उद्देश्य आगामी महीनों में संभावित तापमान वृद्धि, जल संकट, स्वास्थ्य जोखिम तथा फसल एवं आजीविका पर पड़ने वाले प्रभावों के मद्देनज़र समन्वित रणनीति तैयार करना था।

मौसम पूर्वानुमान एवं संभावित जोखिम

बैठक में प्रस्तुत मौसमीय विश्लेषण के अनुसार अप्रैल माह में तापमान सामान्य से थोड़ा ऊपर रहने की संभावना है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में तापमान 36 से 38 डिग्री सेल्सियस तक रहने तथा दक्षिणी बिहार के कुछ क्षेत्रों में 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुँचने की आशंका व्यक्त की गई। 17 से 23 अप्रैल के बीच पुनः तापमान वृद्धि की संभावना जताई गई। यह भी संकेत दिया गया कि मई माह में परिस्थितियाँ अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं, जिसके लिए अभी से तैयारी आवश्यक है।

स्वास्थ्य विभाग की तैयारी एवं निर्देश

• हीट वेव से संबंधित बीमारियों की पहचान, उपचार एवं मृत्यु रिपोर्टिंग प्रणाली को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।

• भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप हीट स्ट्रोक की पहचान और प्रमाणन की प्रक्रिया को लागू करने के निर्देश दिए गए।

• जिला एवं पंचायत स्तर तक स्वास्थ्यकर्मियों, आशा कार्यकर्ताओं एवं जीविका दीदियों को प्रशिक्षण देने की आवश्यकता रेखांकित की गई, ताकि प्रारंभिक स्तर पर ही मरीजों की पहचान हो सके।

• यह भी स्वीकार किया गया कि हीट वेव से संबंधित बीमारियों की रिपोर्टिंग अभी भी कम हो रही है, जिसे सुधारने हेतु डिजिटल पोर्टल आधारित रिपोर्टिंग को बढ़ावा दिया जाएगा।

• राज्य स्वास्थ्य समिति के साथ मिलकर एक डैशबोर्ड आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने का निर्णय लिया गया, जिसे कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जोड़ा जाएगा।

कृषि विभाग की रणनीति

• किसानों को फसलों में नमी बनाए रखने, उपयुक्त बीजों का चयन करने तथा जल प्रबंधन के उपाय अपनाने की सलाह देने पर जोर दिया गया।

• ऐसी फसल किस्मों के चयन को बढ़ावा दिया जाएगा जो उच्च तापमान को सहन कर सकें।

• बीज निगम के माध्यम से आवश्यक बीजों की अग्रिम उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

• पंचायत स्तर पर किसान चौपाल के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाने तथा अग्निशमन विभाग को भी इसमें शामिल करने का निर्णय लिया गया।

• पराली जलाने की समस्या को गंभीर चिंता का विषय मानते हुए किसानों को वैकल्पिक उपाय अपनाने के लिए प्रेरित करने पर बल दिया गया।

जल संसाधन एवं पेयजल प्रबंधन

• चापाकलों एवं जलापूर्ति की वर्तमान स्थिति की समीक्षा में पाया गया कि अधिकांश स्रोत कार्यशील हैं, किंतु गर्मी बढ़ने के साथ इन पर दबाव बढ़ेगा।

• सभी गैर-कार्यशील चापाकलों की शीघ्र मरम्मत तथा उनकी थर्ड पार्टी से सत्यापन कराने का निर्देश दिया गया।

• जल संकट वाले संभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहाँ अग्रिम व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया।

• जल स्रोतों के संरक्षण, जल संचयन एवं वैकल्पिक आपूर्ति (टैंकर, सतही जल स्रोत) पर बल दिया गया।

• सोन नहर प्रणाली एवं अन्य स्रोतों से पर्याप्त जल उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु अंतर-विभागीय समन्वय की आवश्यकता पर चर्चा हुई।

नवाचार एवं तकनीकी उपाय

• दुर्गम एवं जल संकट वाले क्षेत्रों में ड्रोन के माध्यम से जल आपूर्ति की संभावनाओं पर विचार किया गया।

• डेटा आधारित निर्णय लेने के लिए रीयल-टाइम डैशबोर्ड, मोबाइल ऐप एवं कॉल सेंटर के उपयोग को बढ़ाने पर बल दिया गया।

• बिहार कृषि ऐप के बढ़ते उपयोग (लगभग 9 लाख डाउनलोड) को सकारात्मक संकेत मानते हुए इसे जागरूकता के माध्यम के रूप में और सशक्त करने का सुझाव दिया गया।

अग्निशमन एवं फसल सुरक्षा

• खेतों एवं खलिहानों में आग लगने की घटनाओं को गंभीर जोखिम मानते हुए पूर्व तैयारी एवं जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया गया।

• अग्निशमन संसाधनों की उपलब्धता, पहुँच एवं प्रतिक्रिया समय में सुधार लाने पर बल दिया गया।

• जोखिम क्षेत्रों की पहचान कर वहाँ विशेष निगरानी एवं संसाधन तैनाती की योजना बनाने को कहा गया।
जन-जागरूकता एवं सामुदायिक सहभागिता

• पंचायत स्तर पर चौपाल, नुक्कड़ नाटक, स्वयंसेवकों एवं स्थानीय संगठनों के माध्यम से व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया गया।

• आपदा प्रबंधन के स्वयंसेवकों, जीविका समूहों एवं स्थानीय नेतृत्व को सक्रिय भूमिका देने का निर्णय लिया गया।

• हीट वेव के लक्षण, बचाव के उपाय एवं त्वरित चिकित्सा सहायता की जानकारी जन-जन तक पहुँचाने पर बल दिया गया।

निगरानी, मूल्यांकन एवं जवाबदेही

• सभी विभागों को निर्देश दिया गया कि वे जिला स्तर पर नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित करें और कार्यों की प्रगति की निगरानी करें।

• कार्यों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए ग्राउंड वेरिफिकेशन एवं बाहरी एजेंसियों से मूल्यांकन कराने पर जोर दिया गया।

• डेटा संग्रह, रिपोर्टिंग एवं फीडबैक सिस्टम को मजबूत बनाने के निर्देश दिए गए।

आगामी कार्ययोजना

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि सभी विभाग अगले 15 दिनों के भीतर अपने-अपने स्तर पर ठोस प्रगति सुनिश्चित करेंगे। अगली समीक्षा बैठक 15 अप्रैल 2026 को आयोजित की जाएगी, जिसमें सभी विभागों द्वारा किए गए कार्यों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। कार्यक्रम समन्वय एवं बैठक क संचालन वरीय शोध पदाधिकारी दीपक कुमार ने किया। बैठक के अंत में यह विश्वास व्यक्त किया गया कि यदि सभी विभाग समन्वित एवं गंभीरता के साथ कार्य करें, तो लू प्रबंधन में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की जा सकती है तथा राज्य के नागरिकों को सुरक्षित रखा जा सकेगा।

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