
भोपाल /मध्यप्रदेश ( मनोज कुमार प्रसाद)24 मार्च।राष्ट्रीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा ने सामाजिक कार्यों और राजनीतिक रणनीति के क्षेत्र में लंबा अनुभव रखने वाले डॉ. अतुल मलिकराम को संगठन का राष्ट्रीय रणनीतिकार नियुक्त किया है। महासभा द्वारा यह निर्णय डॉ. मलिकराम के सामाजिक विजन और संगठनात्मक कौशल को देखते हुए लिया गया है। इस नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य कुर्मी क्षत्रिय समाज को राष्ट्रीय स्तर पर अधिक संगठित, शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाना है।
नियुक्ति पत्र जारी करते हुए राष्ट्रीय महासचिव अधिवक्ता राघव पटेल और राष्ट्रीय सचिव कैलाश गौर ने बताया कि डॉ. मलिकराम का रणनीतिक दृष्टिकोण समाज के असल मुद्दों को प्रकाश में लाने में सहायक होगा। महासभा का मानना है कि वर्तमान दौर में समाज के सामने मौजूद चुनौतियों, जैसे युवाओं के लिए उच्च शिक्षा के अवसर और ग्रामीण क्षेत्रों में कौशल विकास से निपटने के लिए एक ठोस रणनीति की आवश्यकता है, जिसे डॉ. मलिकराम के अनुभव से गति मिलेगी।
अपनी नियुक्ति पर जिम्मेदारी व्यक्त करते हुए डॉ. अतुल मलिकराम ने कहा, “कुर्मी क्षत्रिय समाज का इतिहास बेहद गौरवशाली रहा है। मेरा लक्ष्य समाज के हर वर्ग को जोड़कर एक समग्र विकास योजना पर काम करना है। हम विशेष रूप से युवाओं के लिए स्वरोजगार और उद्यमिता के नए मार्ग खोलने पर ध्यान देंगे, ताकि वे राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा में सक्रिय भूमिका निभा सकें।”
डॉ मलिकराम के अनुसार संगठन के जरिए हमारा प्राथमिक फोकस ग्रामीण युवाओं को उच्च शिक्षा और आधुनिक रोजगार के अवसरों से जोड़ना, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए व्यावसायिक और कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों की शुरुआत करना, देश के विभिन्न राज्यों जैसे मप्र, यूपी, बिहार, राजस्थान, छत्तीसगढ़ आदि में फैले समाज को एक मंच पर लाना, तथा अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक कल्याणकारी नीतियों की पहुँच सुनिश्चित करना है।
गौरतलब है कि डॉ. मलिकराम लंबे समय से सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। उन्होंने बीइंग रिस्पॉन्सिबल, 2030 का भारत और सटीक राजनीतिक गणनाओं जैसे अभियानों के माध्यम से बुजुर्गों की सेवा, पर्यावरण संरक्षण तथा बदलते सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। उनके इन उल्लेखनीय योगदानों को देखते हुए समाज के विभिन्न वर्गों ने उनकी इस नियुक्ति का स्वागत किया है। महासभा को पूरा विश्वास है कि उनकी रणनीतिक कार्यक्षमता और नेतृत्व से न केवल संगठन और अधिक मजबूत होगा, बल्कि समाज का हर व्यक्ति विकास की प्रक्रिया से भी जुड़ सकेगा।

