
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)23 मार्च।भोजपुर की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को एकबार फिर युवाओं ने उच्चाइयों तक ले जाने के लिए संकल्प लिया है।कई कस्बाई युवा कलाकारों ने अपनी विधा को,अपनी प्रतिभा को,अपने प्रस्तुति से मिले शाबाशी को,भक्ति संगीत में एक उभरता सांस्कृतिक मंच के रूप में बनाया है जिसे म्यूजिक मंत्रा से लोग जानते हैं।इसकी प्रस्तुति हर कानों तक पहुंच चुकी है।कलाकारों की लोकप्रियता से मंच ऐतिहासिक सफर में निकल चुका है। इसके निर्देशक मंगलम भारद्वाज ने बताया कि कलाकारों की बारीकियों को समझना,सम्मान के साथ उचित विधा और वाद्य यंत्रों को स्थान देना,सामूहिक निरंतर प्रयास म्यूजिक मंत्रा टीम का उद्देश्य और उपलब्धि है जिसका प्रयास चल रहा है। भक्ति संगीत पर अपने फोकस के संबंध में बताया कि संगीत सुर ताल राग का उद्गम स्थल वेद पुराणों और देवी देवताओं से आया है जो हमारी सांस्कृतिक विरासत और सनातन सभ्यता संस्कृति का द्योतक है। मन को शांत और समाज को सुसंस्कृत बनाता है। जबकि नई संगीत परंपरा समाज में विकृति, विद्वेष और भाईचारा को तोड़ती है। भक्ति संगीत में पुरुष महिला बच्चे जवान बूढ़े सभी पवित्र भावना से एकत्रित होकर सुनते हैं और आनंदित होते हैं।
भजन में सुर ताल और वाद्य यंत्रों का समन्वय मनमोहक और कर्ण प्रिय होता है।जिला गांव शहर के छोटे-छोटे मंचों पर कला का प्रदर्शन करते हुए अब आगे बढ़ चुके हैं राष्ट्रीय स्तर का कोई भी ऐसा मंच नहीं जिस पर इन युवाओं ने अपना कला प्रदर्शन न किया हो और राज्य राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मंचों को सुशोभित कर रहे हैं।म्यूजिक मंत्रा के माध्यम से श्रोताओं के भरपूर स्नेह और सराहना प्राप्त हो रहे है।साथियों का सहयोग, मेहनत, लगन इतिहास बनाएगी मुझे पूरा भरोसा है।टीम में सागर सिंह,साहिल कौशिक राजपूत, प्रतीक शांडिल्य,रोहित श्रीवावास्तव, दिनेश्वर कुमार उर्फ़ गोलू, विख्यात मिश्रा, शाश्वत श्रीवात्सव, मनीष कुमार, ऋषि राज, आकाश मिश्रा, हिमांशु मिश्रा, सूर्यांशु मिश्रा इत्यादि लोग की अहम भूमिका है ।

