एकता
भारत है अपना देश,
इसे हम कभी न बाँटे;
जाति, धर्म, भाषा के झगड़े,
आओ मिलकर पाटें।
चँदा-सूरज एक सभी का,
हिम, सागर है सबका;
झंडा-सिक्का एक सभी का,
यही देश है सबका ।
हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख कोई हो,
या कोई हो बौद्ध इसाई,
कोई बोले हिन्दी,
या ईगंलिश की हो परछाईं।
एक हवा में साँस हैं लेते,
एक वतन में पलते;
जब दैवी प्रकोप है आता,
एक दूजे पर मरते ।
क्षेत्रवाद के नारे से ही,
और न कोई अलग बनेगा
खून सींच आजादी पायी,
प्यारा देश एक है कबसे, आगे एक रहेगा
एक रहेगा, नेक रहेगा,
सब मिल-जुलकर, बस एक रहेगा,
फूलें, फलें सभी बस इसमें,
एक रहेगा, एक रहेगा।

(उक्त कविता ख्यातिप्राप्त लेखक,कवि,व्यंग्यकार,समीक्षक, अनुवादक “डॉ कृष्ण दयाल सिंह”जो एक अवकाश प्राप्त डाक सेवा अधिकारी भी है, उनके साहित्य काल के शुरूआती दौर में 09 फरवरी 1998 को प्रकाशित की गई कविता संग्रह पुस्तक “यत्र-तत्र”से ली गई है और यह कवि की उक्त संग्रह की चौथी रचना है। RKTV NEWS नित्य इनके संग्रहित पुस्तक से क्रमवार एक एक रचना प्रकाशित करेगी। इनकी कई रचनाएं विभिन्न पत्र पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में प्रकाशित होती रहती है साथ ही इनके दर्जनों पुस्तक भी प्रकाशित हो चुके है, वर्तमान में बिहार राज्य के भोजपुर जिला अंतर्गत आरा के वशिष्ठपुरी में निवास करते है। सुझाव और संपर्क हेतु: 9570805395)

