बिहार आगमन के बाद राज्यपाल का पहला औपचारिक कार्यक्रम।
राज्यपाल ने बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण नई वेबसाइट का किया लोकार्पण ।
RKTV NEWS/पटना(बिहार)16 मार्च।बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, पटना में आज राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन के आगमन के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम एवं प्रेस संवाद का आयोजन किया गया। बिहार आगमन के पश्चात यह राज्यपाल का पहला औपचारिक कार्यक्रम था, जो बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सभागार में आयोजित हुआ।
इस अवसर पर आयोजित विशेष कार्यक्रम एवं प्रेस संवाद में राज्यपाल ने बिहार में आपदा प्रबंधन की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि चुनौतियों के बावजूद राज्य ने आपदा प्रबंधन को पेशेवर और तकनीक आधारित स्वरूप देने की दिशा में उल्लेखनीय पहल की है।राज्यपाल ने सरदार पटेल भवन स्थित राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (State Emergency Operation Center) का अवलोकन किया और वहाँ स्थापित आधुनिक तकनीकी प्रणालियों तथा आपदा प्रबंधन की कार्यप्रणाली की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
प्राधिकरण परिसर में राज्यपाल का स्वागत प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. उदय कांत,सदस्यगण पी. एन. राय, नरेंद्र कुमार सिंह, प्रकाश कुमार एवं शंभू दत्त झा, पुलिस महानिदेशक विनय कुमार, गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी, होमगार्ड एवं अग्निशमन सेवाओं की महानिदेशक शोभा ओहटकर, आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह, तथा बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सचिव मोहम्मद वारिस खान सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल द्वारा बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की नई वेबसाइट का लोकार्पण किया गया। साथ ही प्राधिकरण की गतिविधियों और उपलब्धियों पर आधारित एक लघु फिल्म का भी अवलोकन किया गया। अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि सामान्यतः बिहार को आपदा-प्रवण राज्य के रूप में देखा जाता है, जहाँ बाढ़, सूखा और अन्य प्राकृतिक आपदाओं की चुनौतियाँ बनी रहती हैं।
ऐसी परिस्थितियों में इन चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पेशेवर दृष्टिकोण, आधुनिक तकनीक और संस्थागत समन्वय अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण की प्रस्तुतियों और व्यवस्थाओं को देखकर यह स्पष्ट है कि बिहार में आपदा प्रबंधन को व्यवस्थित और पेशेवर स्वरूप दिया जा चुका है।
राज्यपाल ने कहा कि आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए आधुनिक तकनीक, संस्थागत समन्वय और व्यापक जन-जागरूकता अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि समय-समय पर आत्ममूल्यांकन और बाहरी मूल्यांकन के माध्यम से व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाया जा सकता है। उन्होंने Sendai Framework (2015–2030) तथा प्रधानमंत्री के “10 प्वाइंट एजेंडा” को आपदा प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि बिहार में इन सिद्धांतों के अनुरूप कार्य होते देख उन्हें प्रसन्नता हुई। उन्होंने आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के प्रावधानों के बारे में व्यापक जन-जागरूकता फैलाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ियों को जलवायु परिवर्तन और आपदाओं से जुड़ी चुनौतियों के प्रति जागरूक बनाना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए शिक्षा संस्थानों और समाज के विभिन्न वर्गों की सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण होगी। राज्यपाल ने विशेष रूप से बिहार में डूबने की घटनाओं और बिजली गिरने (Lightning) को प्रमुख आपदा जोखिम बताते हुए कहा कि वैज्ञानिक तकनीक और समयपूर्व चेतावनी प्रणालियों के माध्यम से मानव जीवन की क्षति को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने बाढ़ और नदी कटाव जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए समन्वित प्रयासों और आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग की आवश्यकता पर भी बल दिया।
इस अवसर पर उपाध्यक्ष ने अपने संबोधन में राज्यपाल का प्राधिकरण में आगमन पर हार्दिक स्वागत करते हुए कहा कि उनका मार्गदर्शन संस्थान के लिए प्रेरणा और नई दिशा प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में सशक्त नेतृत्व ही संस्थाओं को आगे बढ़ने की ऊर्जा देता है और राज्यपाल का मार्गदर्शन प्राधिकरण के लिए ध्रुव तारे के समान पथप्रदर्शक होगा।
कार्यक्रम में पुलिस महानिदेशक ने अपने संबोधन में कहा कि बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने राज्य में आपदा प्रबंधन की व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्राधिकरण के सहयोग से पुलिस बल के प्रशिक्षण में आपदा प्रबंधन को विशेष रूप से शामिल किया गया है, जिससे पुलिस आपदाओं के समय प्रभावी फर्स्ट रिस्पॉन्डर के रूप में कार्य करने में सक्षम हुई है। उन्होंने कहा कि बिहार पुलिस भविष्य में भी प्राधिकरण के साथ समन्वय करते हुए आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाती रहेगी।
आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि बिहार जैसे आपदा-प्रवण राज्य में प्रभावी तैयारी, समन्वय और आधुनिक तकनीक के उपयोग से आपदाओं का सामना करने की क्षमता लगातार मजबूत की जा रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्यपाल के मार्गदर्शन से राज्य में आपदा जोखिम न्यूनीकरण के प्रयासों को और नई गति मिलेगी।
कार्यक्रम के अंत में राज्यपाल ने मीडिया प्रतिनिधियों के साथ संवाद भी किया। इस अवसर पर आपदा प्रबंधन विभाग के वरिष्ठ पदाधिकारी, विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि तथा मीडिया प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।


