जिला स्तरीय प्रशिक्षण: प्रथम बैच का समापन, दूसरा बैच गुरुवार से।
RKTV NEWS/छपरा (सारण)11 मार्च।इस बार की जनगणना तकनीक के उपयोग के कारण पिछली बार से काफी अलग और आधुनिक होगी. उक्त बातें उप विकास आयुक्त लक्ष्मण तिवारी ने चार्ज, सहायक चार्ज और अन्य अधिकारियों के प्रशिक्षण के तीसरे दिन सत्र प्रारम्भ होने पर कहीं. उन्होंने कहा कि जनगणना में आपकी भूमिका सबसे महत्त्वपूर्ण है. आप ही फिल्ड में आने वाली किसी भी समस्या के ट्रबल शूटर होंगे. साथ ही आपको ही कार्य की निगरानी और डाटा को सत्यापित करना होगा. इस लिए यह प्रशिक्षण बहुत ही महत्त्वपूर्ण है. इसे पूरी सजगता और सूक्ष्मता के साथ ग्रहण करें. प्रगणक, सुपरवाइजर से लेकर चार्ज हेडक्वार्टर समेत हर स्तर के कार्य को बारीकी से समझें. आने वाली समस्याओं का पूर्व आंकलन कर अभी डाऊट क्लियर करें. बाद में कोई भी चूक अक्षम्य होगी.
जनगणना के नाम पर कोई ओटीपी न करें शेयर
अपर जिला जनगणना पदाधिकारी सह डीआईआई ने दो दिन में हुए प्रशिक्षण के टॉपिक को बिन्दुवार रिकैप किया. उन्होंने बताया कि केवल ऐप में लॉगिन के समय ओटीपी का प्रावधान है. लोगों को व्यापक तौर पर जागरूक करें कि किसी अन्य के साथ जनगणना के नाम पर कोई ओटीपी शेयर न करें. कहा कि जनगणना में एकत्र की जाने वाली सूचनाएं अति गोपनीय डाक्यूमेंट हैं. ऐप के स्तर पर इसे अति सुरक्षित बनाया गया है. प्रगणक से लेकर सुपरवाइजर या आपके स्तर पर भी इसका ध्यान रखना चाहिए. उन्होंने बताया कि गणना या सर्वे पूर्णतः मोबाइल एप के माध्यम से होगा. आम नागरिक भी मोबाइल एप के माध्यम से अपनी जानकारी स्वयं दर्ज (स्व-गणना) कर सकेंगे. इस अवसर पर जिला जनसंख्या अधिकारी सह अपर समाहर्ता मुकेश कुमार, निदेशक डीआरडीए शिव कुमार पंडित, स्थापना प्रभारी पदाधिकारी मो गुलाब, स्टेट ट्रेनर सह डीसीएलआर आलोक राज, जिला कल्याण पदाधिकारी सुरेश कुमार, जिला पंचायत राज पदाधिकारी शशि कुमार, जिला सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी रविन्द्र कुमार, जिला सांख्यिकी पदाधिकारी अंजनी कुमार लाल, ओएसडी मिंटू चौधरी आदि उपस्थित थे.
विभिन्न बिंदुओं पर हुई गहन चर्चा
स्टेट मास्टर ट्रेनर आदिति आनंद और जुली कुमारी ने राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किए गए मॉड्यूल के आधार पर ट्रेनिंग को कुशलता पूर्वक संपन्न कराया. उन्होंने एचएलओ मोबाइल ऐप का अवलोकन और इसकी विशेषताएं, एचएलओ प्रश्न 1 से 34 भरने की विधि, एचएलओ सुपरवाइजर ऐप का उपयोग करके डेटा सत्यापन में पर्यवेक्षक की भूमिका पर प्रकाश डाला. उन्होंने डेटा प्रविष्टि को सुगम बनाने, डेटा नैतिकता, गोपनीयता, सुरक्षा
मोबाइल और वेब ऐप संबंधी समस्याओं का निवारण,
ऐप के उपयोग और डेटा सुरक्षा के लिए क्या करें और क्या न करें को समझाया. साथ ही सीएमएमएस डैशबोर्ड के माध्यम से क्षेत्रीय चुनौतियों, उत्तरदाताओं और गणनाकर्ताओं के व्यवहार, डेटा गुणवत्ता और निगरानी को समझाया. वेब पोर्टल और मोबाइल ऐप में जिला व प्रभारी अधिकारियों के लिए डीसीएचबी प्रक्रिया पर दो भाग में चर्चा की गई. अंत में तीस मिनट तीस प्रश्न के आधार ऑनलाईन क्विज आयोजित कर प्रतिभागियों क्षमतावर्द्धन का आंकलन किया गया।

