
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)08 मार्च। 8 मार्च 1975 से पूरे विश्व में महिलाओं के प्रति सम्मान उत्साह और उनके योगदान को स्मरण दिलाने के लिए विश्व अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का आयोजन होता है।
इसमें कहीं अतिसंयोक्ति नहीं है कि महिलाओं की सक्रियता गतिविधियों और कार्यक्षेत्र का दायरा बहुत बढा है और सभी क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही है। लेकिन दिखती घटनाओं से आजभी महिलाओं के अभिभावक सशंकित रहते हैं। इससे अवसर पर कुछ महिलाओं के विचारों को संकलित किया गया है।

महिलाऐं अपनी प्रतिभा से नई ऊँचाइयां हासिल की: डॉ कांति सिंह
डॉ कांति सिंह,निदेशिका RVS पब्लिक स्कूल, सनदियां बांध आरा ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर सभी महिलाओं जिन्होंने अपने साहस परिश्रम और समर्पण से समाज को आगे बढ़ाया है को नमन किया है। उन्होंने कहा की महिला केवल एक परिवार ही नहीं पूरे समाज और राष्ट्र की शक्ति होती है।शिक्षा, विज्ञान, राजनीति, खेल और हर क्षेत्र में महिलाओं ने अपनी प्रतिभा से नई ऊँचाइयाँ हासिल की हैं।महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण से समाज और देश की सच्ची प्रगति संभव है।

महिला दिवस उपलब्धियों का उत्सव नहीं सुरक्षित समाज का संकल्प भी: प्रो डॉ विजयश्री
प्रो डॉ विजयश्री महंथ महादेवानंद महिला महाविद्यालय आरा ने कहा है की महिला सशक्तिकरण से भारत ने रक्षा, राजनीति, खेल, विज्ञान, शिक्षा और नेतृत्व जैसे अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। इन्हें नेशनल डिफेंस एकेडमी में प्रवेश दिया गया जिससे भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं के लिए एक नए युग की शुरुआत की।आईसीसी महिला क्रिकेट विश्व कप 2025 जीतकर देश के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की।प्रयोगशालाओं से लेकर कक्षाओं तक, संसद से लेकर रणभूमि तक, अपनी क्षमता और साहस का परिचय दे रही हैं।यह दिवस केवल उपलब्धियों का उत्सव नहीं, बल्कि एक सुरक्षित, समावेशी और समान समाज के निर्माण का संकल्प भी है।

महिलाओं के बिना कोई काम पूरा नहीं हो सकता : सबीहा बानो
सबीहा बानो अ प्र प्रधानाचार्य मध्य विद्यालय आरा ने कहा की 8 मार्च एक ऐसा ऐतिहासिक और यादगार दिवस है जिस दिन विश्व के तमाम लोग महिलाओं के मेहनत समर्पण और ताकत का गुणगान करते हैं। आदिकाल से महिलाओं ने पुरुषों का सहयोग कर समाज और राष्ट्र को प्रतिष्ठित किया है।आज पूरी दुनिया में महिलाओं ने अपना परचम लहराया है। चाहे साइकल चलाना हो या हवाई जहाज, या प्रशासनिक सेवा या सुदूर सीमा क्षेत्र,सभी कार्य महिलाओं ने बखूबी निभाया है।सच तो यही है कि कोई भी काम महिलाओं के बिना पूरा नहीं हो सकता है।महिलाओं को भगवान ने ही शक्तिशाली बनाया है जो असहनीय दर्द को झेलते हुए आगे बढ़ने की सलाहियत, हिम्मत रखती हैं।
