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पटना:महिला दिवस की पूर्व संध्या पर महापौर, उपमहापौर तथा अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी समेत २१ महिलाओं का हुआ सम्मान।

साहित्य सम्मेलन में ‘नयी दिशा परिवार” ने आयोजित किया सम्मान-सह-सांस्कृतिक समारोह।

RKTV NEWS/पटना(बिहार)07 मार्च। ज्ञान और विवेक पर आधारित महिलाओं के सशक्ति-करण से समाज पूष्ट और अत्यंत कल्याणकारी बन सकता है। यह सम्यक् शिक्षा से संभव है। महिला-सशक्तिकरण का अर्थ पुरुषों के विरुद्ध किसी शक्ति का खड़ा होना या करना नहीं है। महिला-सशक्ति करण का तात्पर्य एक ऐसे समाज का निर्माण करना है, जिसमें महिलाओं की नैसर्गिक शक्ति का मंगल-दायक समाज के निर्माण में सदुपयोग हो सके। प्रकृति ने नारी के हृदय को विशाल बनाया है। वह प्रेम और वात्सल्य की महान संपदा है। जननी के रूप में वह सृष्टि की अमूल्य निधि है।
यह बातें शनिवार को ‘विश्व महिला दिवस’ की पूर्व संध्या पर, सांस्कृतिक-संस्था ‘नयी दिशा परिवार’ के तत्त्वावधान में बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में आयोजित ‘कर्मयोगी महिला सम्मान-समारोह’ की अध्यक्षता करते हुए, सम्मेलन के अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कही। उन्होंने कहा कि आदिकाल में ‘नारी-सत्तात्मक’ समाज था। स्त्रियों का सम्मान पुरुषों से अधिक था। स्त्रियाँ शिक्षा समेत ज्ञान-विज्ञान और सामाजिक व्यवस्था में अग्रणी थीं। मध्य-काल के काले काल-खण्ड में अशिक्षा के कारण समाज का पराभव हुआ और स्त्रियाँ सम्मान के स्थान पर भोग की वस्तु हो गयीं। नए समाज में महिलाएँ पुनः सशक्त हुई हैं, किंतु उन्हें वह स्थान अभी प्राप्त करना शेष है, जो पुरा-काल में था, जिस काल में स्त्रियाँ पुरुषों के साथ वेद की ऋचाओं का सृजन कर रही थीं।
इस अवसर पर संस्था की ओर से पटना की महापौर सीता साहू, उप महापौर रेशमी चंद्रवंशी, पटना सिटी न्यायालय में अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अनुपमा त्रिपाठी, डा किरण शरण, रीता रस्तोगी, वार्ड पार्षद पिंकी यादव, वार्ड पार्षद अंजलि राय, वार्ड-पार्षद करुणा राय, कवयित्री डा मीना कुमारी परिहार ‘मान्या’, मीरा श्रीवास्तव, अवंतिका सिन्हा, बिंदु किशोरी, वंदना कुमारी, डा संध्या, डा ज्योति प्रकाश, चंद्र पूर्णिमा, संयुक्ता कुमारी, आरती कुमारी, अर्चना कमल तथा नीलम कुमारी को ‘कर्मयोगी महिला सम्मान’ से अलंकृत किया गया।
समारोह की विशिष्ट अतिथि मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अनुपमा त्रिपाठी ने कहा कि स्त्री और पुरुष मिलकर ही सुंदर समाज का निर्माण कर सकते हैं। महिला-सशक्ति करण का अर्थ पुरुष को कमजोर करना तथा उन्हें नीचा दिखाना नहीं है। एक-दूसरे के प्रति आदर की भावना विकसित कर ही हम रहने योग समाज बना सकते हैं। महिलाएँ ये न सोचें कि पुरुषों को धक्का देकर वो आगे बढ़ सकती हैं। सशक्ति-करण से समाज में दोनों का समान योगदान हो सकता है। संस्था के अध्यक्ष राजेश वल्लभ, कमल नयन श्रीवास्तव, अधिवक्ता नवीन सिन्हा तथा पत्रकार प्रेम कुमार ने भी अपने विचार व्यक्त किए तथा महिला सशक्ति-करण के महत्त्व पर प्रकाश डाला । संस्था के सचिव और इस समारोह के संयोजक राजेश राज ने मंच का संचालन किया!
इस अवसर पर संस्था की ओर से भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी प्रस्तुतियाँ हुईं, जिसमें कुमार पंकज सिन्हा और राजा बाबू के गायन तथा लक्ष्मी कुमारी, प्रियांशी और अदिति मौर्या के नृत्य को खूब सराहना मिली। श्रीमती ऋतुराज राजेश, सपना रानी, पिंकी शर्मा, जूली कुमारी, अनामिका, मोहित कुमार, सूरज कुमार, कौशल राज, उज्ज्वल राज, युवराज और नैतिक ने आयोजन में सहायता दी।

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