
ब्रह्मपुर/बक्सर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)11 फरवरी।महाशिवरात्रि के अवसर श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह के अंतर्गत कथा कहते हुए ब्रह्मपुर पीठाधीश्वर आचार्य धर्मेंद्र ने श्री कृष्ण जी की गोचरण लीला का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान किसी का अहंकार नहीं रहने देते हैं। इन्होंने ब्रह्माजी द्वारा बच्छड़ो की चोरी और श्रीकृष्ण द्वारा गिरिराज धारण की कथा कही। गिरिराज धारण व पूजन के माध्यम से भगवान नै प्रकृति पूजन का संदेश दिया। यमुना में कलिया नाग का मर्दन कर नदियों को प्रदूषण मुक्ति का संदेश दिया। आचार्य जी ने श्री मद्भागवत में वर्णित वेणुगीत ,भ्रमर गीत , गोपी गीत आदि की गंभीर व्याख्या करते हुए भक्ति के विविध स्वरूपों का वर्णन किया। गोपी विरह का कारूणिक व्याख्या सुन श्रोता भावविभोर होते रहे। संदीपन आश्रम में सुदामा से मित्रता और गुरु दक्षिणा चुकाने की कथा ,श्रीकृष्ण रूक्मिणी विवाह की प्रस्तुति देते हुए 16108 विवाह की सूत्रात्मक शैली में कथा कही।-दातात्रेय के २४ गुरुओं का रहस्य बताया। सुदामा व कृष्ण की दोस्ती से सिख लेने का संदेश दिया। आचार्य धर्मेन्द्र ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का सार सदा , प्रसन्न रहना और गोविन्द के चरणों में प्रपन्न रहना है। आरती,भंडारा के साथ कथा का विश्राम हुआ।
