पूर्वी सिंहभूम जिले के 6 प्रखंडों पोटका, पटमदा, जुगसलाई, मुसाबनी, घाटशिला, बोड़ाम में 10-25 फरवरी 2026 तक चलेगा विशेष अभियान, 9 लाख लोगों को दवा खिलाने का लक्ष्य।

उपायुक्त ने कस्तुरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय सुंदर नगर जुगसलाई में फाइलेरिया उन्मूलन हेतू बच्चों को एलबेंडाजोल एवं डीइसी की दवा खिला कर अभियान का किया शुभारंभ।

अभियान के प्रथम दिन आंगनबाड़ी केन्द्र तथा विद्यालयों में बनाये गये विशेष बूथों में तथा शेष दिन घर घर जाकर एलबेंडाजोल एवं डीइसी की दवा खिलाइ जाएगी।
RKTV NEWS/जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम)11 फरवरी।पूर्वी सिंहभूम जिले में उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने कस्तुरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय सुंदर नगर, जुगसलाई में फाइलेरिया उन्मूलन पखवाड़ा का शुभारंभ किया। मौके पर उपायुक्त ने स्वयं भी एलबेंडाजोल एवं डीईसी की दवा बच्चों के साथ सेवन किया। 10 से 25 फरवरी 2026 तक जिले के पोटका, पटमदा, जुगसलाई, मुसाबनी, घाटशिला एवं बोड़ाम सहित 6 प्रखंडों में फाइलेरिया उन्मूलन हेतु विशेष अभियान संचालित होगा। अभियान के तहत लगभग 9 लाख लोगों को फाइलेरिया से बचाव की एलबेंडाजोल एवं डीईसी की दवा खिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
अभियान के प्रथम दिन सभी आंगनबाड़ी केंद्रों एवं विद्यालयों में बूथ बनाकर स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं एवं आंगनबाड़ी सेविका द्वारा दवा खिलाई गई, अभियान के शेष दिनों में घर-घर जाकर लक्षित आबादी को दवा खिलाई जाएगी।
इस अवसर पर उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने फाइलेरिया के कारण, लक्षण एवं बचाव की जानकारी देते हुए जिलेवासियों से अपील की कि वे दवा का सेवन अवश्य करें, अफवाहों पर ध्यान न दें और फाइलेरिया उन्मूलन अभियान को सफल बनाने में प्रशासन का सहयोग करें। फाइलेरिया से बचाव हेतु जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा साल में एक बार सामूहिक दवा सेवन अभियान चलाया जा रहा है। यह दवा सभी पात्र व्यक्तियों द्वारा घर-घर आने वाले स्वास्थ्य कर्मियों के सामने सेवन करना अनिवार्य है। वर्ष 2027 तक फाइलेरिया मुक्त झारखण्ड बनाने का लक्ष्य निर्धारित है।
सिविल सर्जन डॉ0 साहिर पाल ने कहा 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती महिलाएं एवं अत्यधिक बीमार व्यक्ति दवा का सेवन नहीं करेंगे। दवा खाली पेट नहीं खानी है। सेकुछ लोगों में हल्के दुष्प्रभाव हो सकते हैं, जिनसे घबराने की आवश्यकता नहीं है। यह दवाएं निःशुल्क एवं सुरक्षित हैं। फाइलेरिया उन्मूलन हेतु सभी पात्र नागरिकों से सहयोग की अपील की गई है। फाइलेरिया को आम तौर पर हाथी पाँव कहा जाता है। यह बीमारी मच्छर के काटने से फैलती है। इससे हाथ, पैर, स्तन और हाइड्रोसील में असामान्य सूजन हो सकती है। संक्रमण अक्सर बचपन में होता है, लेकिन लक्षण 5 से 15 साल बाद दिखते हैं। यह विकलांगता और कुरूपता पैदा कर सकती है। हाइड्रोसील का इलाज संभव है; अन्य अंगों की सूजन का इलाज अक्सर लंबा चलता है। पीड़ितों के प्रति सहयोग और करुणा जरूरी है, भेदभाव नहीं होना चाहिए। फाइलेरिया के रोक थाम एवं नियंत्रण के लिए लोग मच्छरदानी का प्रयोग करें, साफ सफाई रखें तथा फाइलेरिया से बचाव की दवा खायें। किसी परेशानी की अवस्था में नजदिकी स्वास्थ्य केन्द्र से संपर्क करें।

