
RKTV NEWS/पटना (बिहार)23 जनवरी।बिहार में 1990 के दशक का साक्षरता आंदोलन केवल पढ़ना–लिखना सिखाने का अभियान नहीं था, बल्कि वह सामाजिक चेतना, आत्मविश्वास और लोकतांत्रिक भागीदारी की नींव रखने का प्रयास था। इसी ऐतिहासिक दौर में रवीन्द्र भारती ने “साक्षरता अभियान एवं वातावरण निर्माण प्रभारी” के रूप में जिस भूमिका का निर्वाह किया, वह शिक्षा को कला, संचार और सामुदायिक सहभागिता से जोड़ने का एक अनूठा उदाहरण है।
1994 के आसपास, जब पंचायत राज अधिनियम के क्रियान्वयन और ग्राम स्वशासन की अवधारणा को जन–जन तक पहुँचाने की आवश्यकता थी, तब सहार जैसे संवेदनशील ग्रामीण क्षेत्रों में नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से लोकतांत्रिक मूल्यों का संचार किया गया। अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के विद्वानों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की सहभागिता के साथ मंचित इन नाटकों ने यह सिद्ध किया कि रंगमंच केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम है।
इसके बाद बिहार के साक्षरता अभियान के अंतर्गत रवीन्द्र भारती ने नाट्य लेखन, निर्देशन और प्रशिक्षण के ज़रिये गाँव–गाँव एक रचनात्मक वातावरण खड़ा किया। बच्चों और युवाओं को अभिनय, संवाद और आत्म-अभिव्यक्ति का प्रशिक्षण दिया गया, जिससे उनमें आत्मविश्वास और नेतृत्व के गुण विकसित हुए। आज उसी दौर में प्रशिक्षित अनेक युवा देश और विदेश में विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रहे हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि साक्षरता जब रचनात्मकता से जुड़ती है, तो वह पीढ़ियों का भविष्य गढ़ती है।
दो दशकों से अधिक की मीडिया और रंगमंच यात्रा में रवीन्द्र भारती ने पत्रकारिता, टेलीविजन, फिल्म, डॉक्यूमेंट्री और प्रशिक्षण के माध्यम से सामाजिक मुद्दों को लगातार उठाया है। आपदा प्रबंधन, शिक्षा, संस्कृति और जनजागरण उनके प्रमुख कार्यक्षेत्र रहे हैं। उन्होंने न केवल समाचार और कार्यक्रमों का निर्माण किया, बल्कि संचार को सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ते हुए संस्थागत मॉडल भी विकसित किए।
वर्तमान समय में उनका कार्यक्षेत्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक विस्तारित हो चुका है। वे मानते हैं कि तकनीक, विशेषकर AI, मानवीय संवेदना का विकल्प नहीं बल्कि उसकी पहुँच और प्रभाव को कई गुना बढ़ाने का साधन है। आपदा पूर्व चेतावनी, डिजिटल प्रशिक्षण, सिमुलेशन आधारित लर्निंग और अंतिम व्यक्ति तक सूचना पहुँचाने में AI के उपयोग पर उनके प्रयास इस सोच को दर्शाते हैं।
रवीन्द्र भारती की यात्रा साक्षरता अभियान से शुरू होकर मीडिया, रंगमंच और अब तकनीक के संग सामाजिक परिवर्तन तक पहुँची है। यह यात्रा बताती है कि जब कला, शिक्षा और विज्ञान एक साथ चलते हैं, तो समाज में केवल जानकारी नहीं, बल्कि चेतना का प्रसार होता है। राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में उनका कार्य यह संदेश देता है कि सशक्त भारत की नींव साक्षर, संवेदनशील और तकनीक–समर्थ नागरिकों से ही रखी जा सकती है।
रवीन्द्र भारती : प्रमुख कार्य एवं उपलब्धियाँ
बिहार साक्षरता अभियान में वातावरण निर्माण प्रभारी।
जनजागरण के लिए रंगमंच और संचार का उपयोग।
पंचायत राज, शिक्षा, लोकतंत्र जैसे विषयों पर नाट्य लेखन व निर्देशन।
गाँव–गाँव बच्चों और युवाओं को अभिनय व संवाद का प्रशिक्षण
1994 में पंचायत राज क़ानून पर ऐतिहासिक नाट्य प्रस्तुति।
सहार प्रखंड के संवेदनशील क्षेत्र में मंचन।
कैम्ब्रिज व कील विश्वविद्यालय तथा आईएएस मनोज कुमार के साथ सहभागिता।
लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण पर राष्ट्रीय–अंतरराष्ट्रीय स्तर की सांस्कृतिक पहल।

रंगमंच और प्रशिक्षण
सामाजिक विषयों पर 50 से अधिक नाटकों का लेखन।
100 से अधिक नाट्य प्रस्तुतियों का निर्देशन।
कारागार, विद्यालय, गाँव और विश्वविद्यालय स्तर पर कार्यशालाएँ।
सैकड़ों बच्चों और युवाओं को रंगमंच, आत्म-अभिव्यक्ति और नेतृत्व का प्रशिक्षण।
मीडिया और पत्रकारिता
इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट, डिजिटल और ब्रॉडकास्ट मीडिया में 20+ वर्षों का अनुभव।
राष्ट्रीय चैनलों पर न्यूज़, करंट अफेयर्स और विशेष कार्यक्रमों का निर्माण व निर्देशन।
चुनाव आधारित लाइव कार्यक्रमों और बहसों का संचालन।
वरिष्ठ पत्रकार, संपादक और प्रोड्यूसर के रूप में कार्य
डॉक्यूमेंट्री और फिल्म निर्माण।
संस्कृति, आपदा प्रबंधन, सामाजिक विकास और शिक्षा पर आधारित डॉक्यूमेंट्री।
दूरदर्शन और अंतरराष्ट्रीय चैनलों के लिए कार्यक्रम निर्माण।
संस्थागत नेतृत्व और प्रशिक्षण
राष्ट्रीय स्तर की मीडिया और थिएटर कार्यशालाओं का संचालन।
सरकारी एवं सामाजिक संस्थानों के लिए संचार रणनीति और प्रशिक्षण मॉडल।
आपदा प्रबंधन और जनसंचार
आपदा जागरूकता, प्रशिक्षण और जनसूचना अभियानों की रूपरेखा।
आपदा संचार को मीडिया, थिएटर और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ना।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सामाजिक उपयोग।
आपदा पूर्व चेतावनी, डिजिटल लर्निंग, सिमुलेशन प्रशिक्षण और कंटेंट ऑटोमेशन में AI का प्रयोग।
– “AI for Social Impact” की अवधारणा पर परियोजनाएँ और मॉडल विकास।
