आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा) 16 जून। रक्त दान को सबसे बड़ा दान माना जाता है।इसकी महिमा से सभी वाकिफ हैं और जरूरत पर, मजबूरी में रक्तदान करने आते हैं ।लेकिन अपनी दिनचर्या में इसे सम्मिलित करना सबसे बड़ी बात है। मैं चित्रांश दुर्गेश पिता दिनेश मुन्ना पूर्व पार्षद, मां प्रिया सिन्हा, पूर्व पार्षद निवासी मौलाबाग आरा,अब निर्भीक होकर स्वेच्छा से रक्तदान करने ब्लड बैंक आ जाता हू ।पहली बार रक्तदान करने में मुझे भी संशय,डर तथा कमजोरी का एक के मनोवैज्ञानिक दबाव दिमाग में था। लेकिन रक्तदान करने के बाद मुझे काफी उत्साह, फुर्ती और शरीर के खून संबंधी रोगों की जांच से यह खुशी मिली कि मुझे किसी प्रकार का कोई बीमारी नहीं है। मैं पहली बार 14 नवंबर और दूसरी बार 11 मार्च को ब्लड दे रहा हूं। मैं सभी युवा साथियों से निवेदन भी करना चाहता कि आप किसी के घटना, तबीयत खराब या ऑपरेशन का इंतजार नहीं करें बल्कि हर 3 माह के बाद स्वैच्छिक रक्तदान करें और ब्लड बैंक को समृद्ध बनाएं। मैं दिनेश अंकल के रक्तदान मुहिम को सदा आगे बढ़ाने के लिए तत्पर हूं।

