एशिया के पहले शास्त्रीय संगीत विश्वविद्यालय को केंद्रीय धरोहर बताया।
कुलपति प्रो. डॉ. लवली शर्मा ने सांसद का आभार जताया।
खैरागढ़/छत्तीसगढ़ (रवींद्र पांडेय) 11 दिसंबर। संसद के वर्तमान सत्र के दौरान आज राजनांदगांव के सांसद संतोष पांडेय ने इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिए जाने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक धरोहर है। उन्होंने आगे बताया कि खैरागढ़ स्थित यह संस्थान शास्त्रीय संगीत को समर्पित एशिया का पहला विश्वविद्यालय है। यहां नृत्य, संगीत, चित्रकला, मूर्तिकला, ग्राफिक्स, क्राफ्ट एवं डिजाइन सहित अनेक कला विधाओं की शिक्षा दी जाती है और विदेशों से भी छात्र अध्ययन करने आते हैं। सांसद श्री पांडेय ने जोर देकर कहा कि वैश्विक स्तर पर विश्वविद्यालय की बड़ी प्रतिष्ठा है, लेकिन इसे अब तक वह उचित मान-सम्मान नहीं मिला जिसका यह हकदार है।
तीन दिवसीय खैरागढ़ महोत्सव में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए थे सांसद
19 से 21 नवंबर तक आयोजित तीन दिवसीय खैरागढ़ महोत्सव के प्रथम दिन सांसद संतोष पांडेय बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित थे। वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. डॉ. लवली शर्मा ने की थी। इस दौरान सांसद ने विश्वविद्यालय की आर्ट गैलरी का भ्रमण कर यहां की विभिन्न कलाओं को बारीकी से देखकर उसका अवलोकन किया था। साथ ही विश्वविद्यालय की प्रकृति से अवगत हुए थे। उन्होंने तीन दिवसीय खैरागढ़ महोत्सव की भी सराहना की थी और इस विश्वविद्यालय के विकास में सहयोग की बात कही थी। ललित कलाओं को समर्पित इस विश्वविद्यालय को आगे बढ़ाने के लिए सांसद ने संसद भवन में मांग उठाई और इस विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने की मांग की है।
कुलपति ने सांसद का जताया आभार
इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. डॉ. लवली शर्मा अपनी पदस्थापना के बाद से ही विश्वविद्यालय को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए नवाचार सहित विभिन्न कार्य कर रही हैं। ऐसे में सांसद संतोष पांडेय के द्वारा संसद में इस विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने की मांग की सराहना करते हुए कुलपति ने सांसद श्री पांडेय का आभार जताया है। उन्होंने कहा है कि विश्वविद्यालय को दुनिया का श्रेष्ठ विश्वविद्यालय बनाना है, जिसके लिए इस विश्वविद्यालय को केंद्रीय पटल पर ले जाना आवश्यक है।

