बिहटा/ बिहार(अनिल सिंह)13 जून।आजकल देश सहित राज्यों,जिला,और पंचायत स्तर पर विकास और स्वच्छता की बातों का प्रचार प्रसार संबंधित विभागों की वेबसाइट और अखबारों या और भी सोशल मीडिया के माध्यमों से देखने को मिलती रहती है।जिनमे अपने अपने विभागों द्वारा किए गए कार्यों को काफी संजीदा ढंग से बयान किया जाता है। जिसे देखकर आम जनता को लगता है की हम संपूर्ण विकास की और तेजी से आगे बढ़ रहे हैं वही दूसरी ओर वो समाज जो समस्याओं से परेशान है और उसके समाधान के लिए कई विभागों और अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काट चुका है। वो अपने हाथों में समस्याओं के समाधान के आवेदन और उन विकास के संदेशों के बीच उलझा रहता है।
जाने क्या है मामला?
दानापुर स्तिथ ऊर्जा नगर में मुख्य रास्ते पर जल जमाओ से लोगो के आवागमन और बच्चों को स्कूल जाने में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।इस सम्बन्ध में आरटीआई कार्यकर्ता राकेश रॉय सहित ऊर्जा नगर के लोगो ने जिलाधिकारी सहित सम्बन्धित पदाधिकारियों को आवेदन दिया है। आवेदन के माध्यम से अपनी समस्याओं से अवगत कराते हुए मुहल्ले वासियों ने लिखा है की ऊर्जा नगर में नाला एवं पक्का सड़क बना हुआ है जो सगुना मोड़ खगौल से जुड़ा हुआ है।घरों का पानी निकलकर सगुना खगौल रोड के नाले में गिरता था जिसे बंद कर रोड बना दिया गया है और पूल के माध्यम से निकलने वाली जल निकासी भी बंद हो गई है।दूसरी और रियाहशी इलाके में अलंकार मारुति सर्विस सेंटर भी खोल दिया गया है जिसका पानी भी सड़क पर जमा हो रहा है और लोगो को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

सिर्फ दिए जाते है आश्वासन
आईआरटीआई कार्यकर्ता राकेश रॉय ने बताया की इस मामले में कार्रवाई की जगह सिर्फ खाना पूर्ति ही की जाती है।उन्होंने बताया की दानापुर नगर एक्सक्यूटिव सुशील कुमार बड़े बड़े बजट के साथ सिर्फ मशीन खरीदने में व्यस्त रहते है।धरातल पर कोई काम नहीं होता है सिर्फ माननीयों के आने पर खानापूर्ति के लिए निरीक्षण किए जाते हैं।

निरीक्षण में आ चुके है सांसद रामकृपाल यादव
सांसद के निरीक्षण के संबंध में राकेश रॉय ने बताया की कुछ दिनों पहले संसद महोदय भी ऊर्जा नगर दानापुर में आए जल जमाओ को देखा एक फोन घुमाया फोटो खिंचवाई और जाने लगे जिसका विरोध मेरे और संटू कुमार ,ललन शर्मा सहित अन्य निवासियों द्वारा किया गया तो उन्होंने भी आश्वासन का जुमला पढ़ा और निकल गए।
आएं दिन होती है तू तू मैं मैं
सामाजिक व आरटीआई कार्यकर्ता राकेश रॉय ने बताया की जलजमाओ से बचकर निकलने के चक्कर में हर दिन कोई न कोई वृद्ध या बच्चा गिरता रहता है।रोगियों को इलाज के लिए ले जाने में भी आती है मुश्किलें जिसके कारण स्थानीय निवासियों और सर्विस सेंटर के कर्मचारियों के बीच हमेशा तनाव और लड़ाइयां होती रहती है जो डर है की कही ये वृहत रूप न ले ले।

जांच कमिटी की मांग
स्थानीय निवासियों की तरफ से राकेश रॉय ने नगर परिषद से मांग की है की यथाशीघ्र पानी के जलजमाओं को हटाया जाए साथी ही सरकार से एक जांच कमिटी बिठाकर स्वच्छता के नाम पर खरीदे जाने वाली मशीनों का उपयोग कहा होता है? और अगर आवश्यकता नही है तो इतना बजट क्यों खर्च किया जाता है?
