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पटना:राज्य की अभिलेखीय विरासत के प्रति जागरूकता के लिए अभिलेख प्रदर्शनी का हुआ आयोजन।

पटना /बिहार (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)09 दिसंबर।बिहार राज्य अभिलेखागार निदेशालय (मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग), बिहार सरकार द्वारा राज्य की अभिलेखीय विरासत के प्रति जनमानस में जागरूकता के उद्देश्य से अभिलेख प्रदर्शनी का आयोजन किया जाता रहा है। इसी श्रृंखला में बिहार राज्य अभिलेखागार एवं उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, पश्चिम बंगाल एवं सिक्किम राज्य अभिलेखागार के संयुक्त तत्वावधान में भारतीय उपमहाद्वीप के दो पड़ोसी देशों-भारत और नेपाल के बीच राजनीतिक, प्रशासनिक, सांस्कृतिक एवं राजनयिक संबंधों के विकास को अभिलेखों के माध्यम से प्रदर्शित करने के लिए आयोजित है।
देश के विभिन्न राज्य अभिलेखागारों में भारत-नेपाल संबंधों से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेजों का समृद्ध संग्रह सुरक्षित है, जो दोनों देशों के ऐतिहासिक सांस्कृतिक, आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों की गहराई को दर्शाता हे। प्रदर्शनी में दोनों देशों के मध्य सीमांकन, नदी के प्रवाह में हुए परिवर्तन के कारण पुनः सीमा निर्धारण, संपूर्ण सीमा रेखा का सर्वेक्षण, नेपाल से लकड़ी के निर्यात एवं चाँदी के व्यापार, बिहार-उड़ीसा से नेपाल को भेजे जाने वाले व्यापारिक माल, नेपाल के महाविद्यालय को पटना विश्वविद्यालय से संबद्ध करने का प्रस्ताव आदि है जिसे प्रदर्शित किया गया है।
शिक्षा के क्षेत्र में नेपाल एवं ब्रिटिश सरकार के संबंध अत्यंत महत्वपूर्ण थे। पटना विश्वविद्यालय का नेपाल दरबार हाईस्कूल से गहरा संबंध था और विश्वविद्यालय की परीक्षाओं में नेपाल की ‘परबतिया’ भाषा को मान्यता दी गयी थी। ब्रिटिश भारत और नेपाल के बीच यातायात व संचार व्यवस्था को सुचारू बनाने के भी प्रयास किया गए। 1927 के अभिलेख स्पष्ट रूप से बताता है कि नेपाल और रक्सौल के बीच एक लाइट रेलवे लाइन चलाने की परियोजना के प्रस्ताव पर भूमि का अधिग्रहण भी किया गया था।
प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए डॉ० मो० फैसल अब्दुल्लाह (अभिलेख निदेशक) ने कहा कि यह प्रदर्शनी ऐतिहासिक रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह लगभग सौ वर्षों के लंबे काल खंड में भारत-नेपाल संबंधों के विकास को दर्ज करती है। प्रदर्शित अभिलेख ने केवल द्विपक्षीय संबंधों के उतार-चढ़ाव को दर्शाते है, बल्कि उस युग की प्रशासनिक और राजनीतिक कार्य प्रणालियों का प्रमाणिक चित्र भी प्रस्तुत करते है। प्रदर्शनी में उत्तर प्रदेश राज्य अभिलेखागार के अमिताभ पाण्डेय, अंजनी कुमार त्रिपाठी उत्तराखंड राज्य अभिलेखागार के मनोज जखमोला पश्चिम बंगाल राज्यअभिलेखागार के सुमित घोष, जय प्रकाश सिकदर सिक्किम राज्य अभिलेखागार के बी पी राय एल एन शर्मा आदि अधिकारियों ने भाग लिया। प्रदर्शनी को सफल बनाने में उदय कुमार ठाकुर (सहायक अभिलेख निदेशक) मो० असलम, डॉ० शारदा शरण, डॉ० रश्मि किरण, डॉ० भारती शर्मा, डॉ० पल्लवी आनंद, राम कुमार सिंह, सरपंच राम (पुराभिलेखपाल), पंकज कुमार, रामाशिष कुमार आदि ने योगदान दिया।

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