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इंदौर:कलेक्टर शिवम वर्मा ने मस्कुलर डिस्ट्राफी बीमारी से पीड़ित‍ बच्चों से से किया संवाद।

राबर्ट नर्सिंग होम एण्ड रिसर्च सेंटर में मस्कुलर डिस्ट्राफी विषय पर कार्यशाला आयोजित।

इंदौर/मध्यप्रदेश ( मनोज कुमार प्रसाद) 06 दिसम्बर। राबर्ट नर्सिंग होम एण्ड रिसर्च सेंटर इंदौर में आज शनिवार को मस्कुलर डिस्ट्राफी पर कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में कलेक्टर शिवम वर्मा शामिल हुए। उन्होंने अपने सम्बोधन में कहा कि मस्कुलर डिस्ट्राफी बीमारी के उपचार के लिये जिला प्रशासन हर स्तर पर सहयोग करेगा। इस बीमारी के उपचार के लिये फिजियोथेरेपी ‍चिकित्सा से लेकर दवाईयां आदि उपलब्ध करायेगा। जिला प्रशासन की ओर से अस्पताल में रेम्प लगाये जायेंगे ताकि मस्कुलर डिस्ट्राफी से पीड़ित बच्चों को असुविधा न हो। इसके अलावा सामाजिक न्याय विभाग की ओर से दिव्यांग कार्ड बनाये जायेंगे। कलेक्टर श्री वर्मा ने मस्कुलर डिस्ट्राफी कार्यशाला में पीड़ित बच्चों से कहा कि‍ घबराने और ‍निराश होने की जरूरत नहीं है। वे अपनी पढ़ाई जारी रखे और दूसरों पर कम से कम निर्भर रहे। सामान्य लोगों से मिले और घरों से बाहर निकले। नियमित फिजियोथेरेपी सेंटर पर जाकर फिजियोथेरेपी चिकित्सा कराये। न्यूरोलॉजिस्ट और फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह को गंभीरता से ले। कलेक्टर श्री वर्मा ने राबर्ट नर्सिंग होम एण्ड रिसर्च सेंटर में संचालित मस्कुलर डिस्ट्राफी केयर सेंटर का अवलोकन किया और वहां चिकित्साो ले रहे बच्चों से खुलकर संवाद किया। यह आयोजन सोसायटी फॉर मस्कुलर डिस्ट्राफी के द्वारा किया गया था। कार्यक्रम में श्री राबर्ट नर्सिंग होम के सचिव डॉ.विजय सेन यशलाह ने अस्पताल में चल रही विभिन्न सेवा गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
इंडियन मस्कुलर डिस्ट्राफी एसोसिएशन सोलन (हिमाचल प्रदेश) की अध्यक्ष संजना गोयल ने कहा कि मस्कुलर डिस्ट्रॉफी लगातार बढ़ते रहने वाला मांसपेशियों का एक अनुवांशिक रोग है, जो पूरी तरह ठीक नहीं होता है। इसमें व्यक्ति के शरीर की शक्तियाँ धीरे-धीरे कमजोर होती चली जाती हैं और वह चलने फिरने में असमर्थ हो जाता है। अंततः वह रोजमर्रा के कामों के लिए भी दूसरों पर आश्रित रहता है। मस्कुलर डिस्ट्रॉफी मुख्य रूप से नौ प्रकार की होती है। प्रत्येक वर्ष भारत में लगभग 4 हजार बच्चे मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से ग्रसित पैदा होते हैं। सामान्यतः यह बीमारी परिवार में एक से अधिक बच्चों को प्रभावित करती है। कुछ प्रकार के मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के लक्षण बचपन में ही परिलक्षित हो जाते हैं, जबकि कुछ अन्य मामलों में किशोरावस्था या वयस्क होने पर इसके लक्षण दिखते हैं।
संस्था के प्रबंधक सुनील न्याती ने बताया कि मध्यप्रदेश में मस्कुलर डिस्ट्राफी बीमारी से करीब ड़ेढ सौ बच्चे पीड़ित है। इनमें से 42 बच्चे अकेले इंदौर जिले में है। कार्यशाला में आज इंदौर के अलावा खरगोन, मक्सी, उज्जैन, ग्वालियर आदि स्थानों से करीब 50 से अधिक बच्चे अपने माता पिता के साथ आये और उन्होंने यहां अपनी जांच के साथ फिजियोथेरेपी चिकित्सा भी ली। कार्यशाला में अरूण कुमार मिश्रा ने बताया कि राबर्ट नर्सिंग होम में सोसायटी फॉर मस्कुलर डिस्ट्राफी सेंटर इसी वर्ष से शुरू किया गया है। यहां रोजाना 25 से अधिक मस्कुलर डिस्ट्राफी बीमारी से पीड़ित बच्चे आते है। जिनकी फिजियोथेरेपी चिकित्सा की जाती है। कार्यशाला में न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. रचना दुबे, डॉ. गिरीराज चेंडक, फिजियोथेरेपिस्ट कोमल ठाकरे, विठ्ठल शर्मा, डायटिशियन डॉ. विजेता जैन ने अपनी सेवाएं दी।
कार्यशाला में‍ स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हेमंत गुप्ता ने कहा कि मस्कुलर डिस्ट्राफी से पीड़ित बच्चों को स्वास्थ्य विभाग की ओर से नि:शुल्क दवाईयां उपलब्ध कराई जायेगी। कार्यशाला में मन जैन, शैलेन्द्र सोलंकी सहित मस्कुलर डिस्ट्राफी से पीड़ित बच्चे और उनके परिजन उपस्थित थे।

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