नेता-चरित्रम्
पहले सबकी सेवा नेता करते थे, अब करते सब उनकी; घर डूबा, कुछ राहत भेजो, कैसी बातें करते सनक।
अभी नहीं हेलिकोप्टर आया, नहीं हुआ सर्वेक्षण सबकी, उड़ लेने दो, हो जाने दो, दम थामों कुछ अबकी ।
क्षति हुई अनुमान लगाने, आयेगा सरकारी दल; जितनी हानि, अधिक निरीक्षण, राहत का है ऐसा हल।
दहाई कि राहत, हजारों की हानि पर ही मिलता है; राहत कोष में फिर, आप से ही दान माँगा जाता है।
फिर भी घाटा बजट का, सालोंसाल बढ़ जाता है; राहत और बजट का नाता, समझ नहीं कुछ आता है।
पाँच साल हो जाने पर, नेता धरती पर फिर आता है; हल जोतते किसान के हाथों को, दीपक से खोजा जाता है।
जब किसान था प्रश्न पूछता,दुर्दिन में प्रिय आप कहाँ थे,सकुचा कर नेता कहता है, हम उड़ान में आसमान पर घुम रहे थे।
और कहता, डुबते सिर को, पहले मैंने ही गिना था; पानी अधिक न बढ़ पाये, बोतल पहले ही जुटा चुका था।
डूबे थे तुम बेहोश हुए थे, मैं भी डूबा था बेहोशी में; तुम थे बाढ़ का पानी पीते, मैं बोतल का, हम-तुम रहे बेहोशी में।
बाढ़ घर को निगलकर, सागर में छिप जाता है; नेता राहत को निगलकर, छुपने को छटपटाता है।
सही, नेता वही है बन्धों, जो दुर्दिन में साथ रहेगा; हम सबकी बात कहेगा। अपने पहले जो,
आज गाँधी, पटेल, सुभाष, आजाद, श्यामा प्रसाद यदि होते; आज अपने वंशजों की चाल पर, बस फूट-फूट कर रोते।

(उक्त कविता ख्यातिप्राप्त लेखक,कवि,व्यंग्यकार,समीक्षक, अनुवादक “डॉ कृष्ण दयाल सिंह”जो एक अवकाश प्राप्त डाक सेवा अधिकारी भी है, उनके साहित्य काल के शुरूआती दौर में 09 फरवरी 1998 को प्रकाशित की गई कविता संग्रह पुस्तक “यत्र-तत्र”से ली गई है और यह कवि की उक्त संग्रह की ग्यारहवीं रचना है। RKTV NEWS नित्य इनके संग्रहित पुस्तक से क्रमवार एक एक रचना प्रकाशित करेगी। इनकी कई रचनाएं विभिन्न पत्र पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में प्रकाशित होती रहती है साथ ही इनके दर्जनों पुस्तक भी प्रकाशित हो चुके है, वर्तमान में बिहार राज्य के भोजपुर जिला अंतर्गत आरा के वशिष्ठपुरी में निवास करते है। सुझाव और संपर्क हेतु: 9570805395)

