कवि सम्मेलन, ओडिसी नृत्य और विशेष प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र।
भोपाल/मध्यप्रदेश (मनोज कुमार प्रसाद) 03दिसंबर। भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म शताब्दी वर्ष पर राजधानी भोपाल दो दिवसीय सांस्कृतिक महोत्सव की मेजबानी कर रही है। नृत्यधाम संस्था, भुवनेश्वर द्वारा आयोजित एवम संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा प्रायोजित यह पुण्य स्मरण कार्यक्रम रविंद्र भवन के “गौरांजनी सभागार” में शाम 6 से रात 9 बजे तक आयोजित हो रहा है। देशभर से आ रहे कवि, कलाकार और जनप्रतिनिधि इसे खास बनाएंगे।
महोत्सव के पहले दिन के कार्यक्रम की अध्यक्षता पद्मश्री विजय दत्त श्रीधर ने की। उप संचालक संस्कृति संचालनालय पूजा शुक्ला मुख्य अतिथि और सारस्वत अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार गोकुल सोनी मंचासीन रहे।
कार्यक्रम का संचालन आकाशवाणी उद्घोषिका डा. प्रिया जैन ने किया।
शुभाश्री पटनायक द्वारा स्वागत उद्बोधन के पश्चात अटल जी के व्यक्तित्व एवम कृतित्व पर प्रकाशित “स्मारिका” का विमोचन किया गया।
अध्यक्षता कर रहे विजयदत्त श्रीधर ने कहा कि अटल जी एक विलक्षण व्यक्तित्व के धनी थे वे राजनीतिक नेता नहीं थे, वे राजनेता थे, स्टेट्समैन इसीलिए उनके सोच में और व्यवहार में बड़प्पन का समावेश था। वे अपने ओजस्वी भाषण के लिए सर्वाधिक लोकप्रिय थे। उनकी सभा में दूर दूर से श्रोता आते थे, जिसमें सभी पक्षों के लोग शामिल रहते थे। इंसानियत उनका सबसे महत्वपूर्ण गुण था। उदारता और सर्वसमावेशी आचार विचार के कारण अटलजी आदर के पात्र थे। वे भारतीय राजनीति के अजातशत्रु थे। उनकी पत्रकारिता और कविताएं उन्हें समाज से जोड़े रखती थी।
वरिष्ठ साहित्यकार गोकुल सोनी ने अटलजी के साहित्यिक अवदान को रेखांकित करते हुए कहा कि अटल जी साहित्यकार पहले थे, राजनेता बाद में। वे वाचिक परंपरा के कवि थे। देश भक्ति और ओज उनकी कविता के मूल उत्स थे। यही कारण है कि उनकी राजनीति में एक साहित्यकार की करुणा, संवेदना और सबको साथ लेकर चलने की विलक्षण क्षमता थी।
माननीय पूजा शुक्ला जो माननीय अटलबिहारी वाजपेई के परिवार से ही हैं, वाजपेई जी उनके नानाजी थे, ने अटल जी से जुड़े पारिवारिक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि अटल जी जेब में काजू किशमिश हमेशा रखते थे और हम बच्चों को देते थे। उन्होंने परिवार और राजनीति में सदैव अंतर रखते थे। भोपाल की पुरानी मनोहर डेरी की मिठाई उनको बहुत पसंद थी। वे परिवार वालों से कहते थे कि जो भी करो अपने दम पर करो।
इस अवसर को यादगार बनाने के लिए प्रतीक्षा परिडा ओडिसी नृत्य धाम भुवनेश्वर द्वारा मोहक ओडिसी नृत्य की प्रस्तुति की गई।
कार्यक्रम में अटलजी के व्यक्तित्व, राष्ट्रभक्ति और संवेदनशील कवि हृदय को मंच पर लघु वृत्त चित्र के माध्यम से सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम के द्वितीय भाग में रंगारंग काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें डा. आलोक चौबे, डा. प्रतिभा द्विवेदी, डा. प्रार्थना पंडित, कुमार चंदन, अनूप धामने, बालकवि अथर्व सोनी अर्थ ने कविता पाठ से समां बांध दिया। काव्य गोष्ठी का सरस और सफल संचालन कवि सत्यदेव सोनी, सत्य ने किया।
अंत में सतीश पुरोहित ने सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यकार, बुद्धिजीवी और श्रोताबंधु उपस्थित रहे।

