
आरा/भोजपुर ( डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)30 नवंबर। शनिवार को श्री सीताराम विवाह महोत्सव महावीर स्थान रमना मैदान,आरा,राष्ट्रीय महिला परिषद माचा स्वामी महिला सेवा समिति द्वारा सप्तम दिवस के प्रातः वेला पर ज्योति पाठक, अनीस मिश्रा ने वैदिक रीति रिवाज से पूजन कराई । पूजनों उपरांत श्री रामचरित्र मानस नवाहान पाठकर्ता शशि भूषण जी महाराज ने पाठ क़े अन्तर्गत संतो क़े लक्षण – सदा मेरी लीलाओ को गाते – सुनते है और विना ही कारण दुसरो क़े हित मे लगे रहनेवाले होते हैँ, संतो क़े जितने गुण हैँ उनको सरस्वती और वेद भी नहीं कह सकते, संत – छः विकारो को जीते हुवे रहते – काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद और मतसर! इन छः विकार मनुष्योक़े पास रहता हैँ जो इसे जीतता हैँ वही संत होता हैँ. सेवरी जाती की भीलनी थी फिर भी उनके अंदर नौ प्रकार की भक्ति थी पहली – संतो की संगती, दूसरी – भक्ति कथा प्रशंगा, तीसरी – अभिमानरहित होकर गुरु चरणों की सेवा, चौथी – कपट छोड़ मेरे गुणगान गाना, पंचम – मेरे नाम मंत्रो जाप दृढ़ता, छठवा – इन्द्रियों का निग्रह, शील रखना, सातवां- अपना संभावना मे राममय देखना, आठवा – कुछ मिल जाय संतोष और पराये मे दोष न देखना, नवम – हृदय मे मेरा याद और भरोसा रखना! पाठ मे सुन्दर काण्ड की पाठ मे सम्मिलित सुनीता देवी, लालती सिंह, उषा पाण्डेय, संतोसी देवी, प्रतिमा मधुकर,पुष्पा सिन्हा, चुनमुन सिंह आदि, वही दोपहर 02.45 से श्रीधाम वृन्दावन धाम से पधारे श्रीमद भागवत कथा व्यास प्रेममूर्ति प्रदीप जी महाराज ने श्री कृष्णा भगवान की बाल चरित्र की ऊपर बख्यान पर जन्मो उतस्व, बधाई मगल गीत क़े साथ प्रभु की नामकरण संस्कार गोकुल की परिभाषा गो – इन्द्रिय, कुल – समूह यानि इन्द्रियों क़े समूह पर अपना कमान नहीं रखोगे तो कष्ट क़े सिवा कुछ नहीं मिलता,जब गर्गगाचार्य – जी को नामकरण क़े बाद माता यशोदा भोजन प्रसाद कराने क़े लिए सोने की थाल मे पकवान खीर दिया तो जैसे गर्गगाचार्य ने आँख बंद करके तुलसी पत्र डालकर ध्यान किया तो श्रीकृष्ण को भोग लगाते देखा माता यशोदा दूसरी थाल मे फिर लाया पुनः तुलसी पत्र डाला फिर श्रीकृष्ण को भोग लगाते पाया तब गर्गाचार्य ने ध्यान से समझकर उस प्रसाद को पान किया कथा को विस्तार कर गोप गोपियों की आनन्द की व्यख्यान किया भागवत जी की आरती पूजन समिति की सदस्यों ने किया, वीणा सिन्हा, उर्मिला सिन्हा, रेखा सिन्हा, गीता सिंह, सीमा मिश्रा, राधिका देवी, अर्चना सिंह, रविशंकर तिवारी, राजन सिंह, जयप्रकाश तिवारी, उमेश बाबा, अविनाश यादव, नवल प्रसाद, पंकज सिंह इत्यादि रहे।
