
भोपाल / मध्यप्रदेश ( मनोज कुमार प्रसाद)23 नवंबर। गुरु तेगबहादुर साहब का 350 वॉ शहीदी पर्व श्रद्धा भक्ति के साथ गुरूद्वारा गुरूनानकपुरा रायसेन रोड़ भोपाल में मनाया गया ।
इस अवसर पर हजारों श्रद्वालुओं ने गुरु तेगबहादुर साहब की शहादत को नमन कर गुरूग्रंथ साहब के चरणों में माथा टेका। इस अवसर पर गुरूद्वारें में कवि दरबार, कीर्तन दरबार एवं प्रवचनों के द्वारा पंथक कवि शुकर गुजार सिंह अमृतसर एवं कवित्री तजिन्दर कौर आनंदपुर साहब एवं रागी जत्था भाई कुलदीप सिंह अमृतसर पंजाब हजुरी रागी जत्था भाई हरमिन्दर सिंह एवं गुरूद्वारा के ग्रंथी भाई कमलजीत सिंह ने कविता, कीर्तन, प्रवर्चन के द्वारा गुरू तेग बहादुर साहब की शहादत को सुनाकर संगत को भाव विभोर का दिया और संगत को गुरू चरणों के साथ जोडा ।
कवि शुकर गुजार सिंह अमृतसर ने कहा बादशाह औरंगजेब ने श्री गुरु तेग बहादुर साहब जी को दिल्ली में लालकिला, बड़ी कोतवाली, चांदनी चौक पर गुरू जी का सिर धड़ से अलग कर शहीद कर दिया एवं भाई मतिदास जी को आरे से चिर कर शरीर के दो टुकड़े कर दिये एवं भाई सतिदास जी को रूई से बांधकर जिंदा जलाया गया एवं भाई दयाला जी को तेल में उबालकर शहीद कर दिया। यह सब गुरू तेग बहादुर साहब जी के शिष्य थे और गुरू तेग बहादुर के सामने यह सब औरंगजेब ने करवाया ताकि गुरू तेग बहादुर डर जाये और इस्लाम कबूल करें लेकिन जब वह नहीं डरे और अपने हिन्दू धर्म की रक्षा के लिये अडिग रहे तो गुरू तेग बहादुर साहब जी का भी सिर धड़ से अलग कर शहीद कर दिया । उस स्थान पर आज गुरूद्वारा चांदनी चौक है, जहां हजारों श्रद्धालु रोजाना गुरू तेग बहादुर साहब की शहादत को नमन कर अपनी श्रद्धा सुमन भेंट करते है। श्री तेग बहादुर साहब जी ने हिन्दू धर्म की रक्षा के लिये अपना बलिदान दे दिया और हिन्दू धर्म की रक्षा करी ।
कवित्री जतिन्दर कौर ने कविता में कहा – तेरे अमृत दी धन शक्ति ने गिदड़ा को शेर बना दित्ते, चिड़ियां खा गईयां बाजां नूँ राठां (राजा) संग रंक लड़ा दिते, चन्न वांगू नाम चमकदा है, तेरे साजे सिंघ सरदारां दा रागी जत्था भाई कुलदीप सिंह अमृतसर ने कीर्तन में कहा जो नर दुख में दुख नहीं मानै, सुख सनेहु अर भै नही जा के कंचन माटी माने एवं उन्होंने कीर्तन में कहा- गुरू तेग बहादुर सिमरिये, घर नउ निध आवै धाये, सब थाई होये सहाये ।
गुरूद्वारा के ग्रंथी भाई कमलजीत सिंह ने अरदास में कहा आज्ञा भई अकाल की, तबै चलाओ पंथ, सब सिक्खन को हुकुम है, गुरू मानयो ग्रंथ, गुरू ग्रंथ जी मानयो प्रगट गुरूा की देह ।
इस अवसर पर गुरूद्वारा के अध्यक्ष गुलदीप सिंह गुलाटी, सेकेट्री जसबीर सिंह भीमरा, रछपाल सिंह, समाजसेवी गुरूचरण सिंह अरोरा सहित हजारों श्रद्वालु उपस्थित थे ।
