
RKTV NEWS/दरभंगा(बिहार )18 नवंबर।वरिष्ठ नागरिकों एवं स्वयं का भरणपोषण करने में असमर्थ माता/पिता की जिम्मेवारी उनके वयस्क पुत्र/पुत्री अथवा ऐसे रिश्तेदारों पर है,जो भविष्य में उनकी संपत्ति का वारिस होंगे।
यह प्रावधान माता/पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरणपोषण एवं कल्याण अधिनियम 2007 में उपबंधित है,उक्त बातें जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव आरती कुमारी ने सोमवार को पेंशनर समाज को संबोधित करते हुए कहीं ।
उन्होंने कहा कि बुजुर्गों के भरणपोषण संबंधी मामलों की सुनवाई एवं आदेश के लिए अनुमंडल स्तर पर ट्रिब्यूनल का गठन किया गया है।
पीड़ित व्यक्ति के आवेदन पर नब्बे दिनों के अंदर सुनवाई कर संबंधित पुत्र/पुत्री अथवा रिश्तेदार को दस हजार रुपये तक मासिक भत्ता देने का आदेश पारित किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी बुजुर्ग ने इस आशय के साथ अपनी संपत्ति दान की है कि उसका भरणपोषण दान प्राप्तकर्ता करेगा परंतु यदि वह ऐसा भरणपोषण नहीं करता है तो दान शून्य घोषित किया जाएगा एवं माना जाएगा कि ऐसा दान कपट,प्रपीड़न एवं अनावश्यक प्रभाव में किया गया है।
सचिव आरती कुमारी ने आगे बताया कि प्रावधान के अनुसार यदि किसी बुजुर्ग को अपने शरीर या संपत्ति पर खतरा हो तो इसकी सूचना जिला पदाधिकारी को दे सकते हैं।
इसके साथ हीं बुजुर्गों के लिए नालसा योजना 2016 के तहत कानूनी सहायता के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार से संपर्क कर सकते हैं या फिर नालसा के टॉल फ्री नंबर 15100 की मदद ले सकते हैं।
कार्यक्रम में अधिवक्ता पुरुषोत्तम कुमार एवं प्रयास संस्था के विरेंद्र कुमार झा एवं प्रोजेक्ट मैनेजर हेल्पेज इंडिया राजीव कुमार ने भी जानकारी साझा किया।
मौके पर पेंशनर समाज के सदस्यगण अमर कुमार झा, अरुण कुमार, शिव कुमार आदि मौजूद थे।
