
आरा/भोजपुर ( डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)16 नवंबर।कभी आरके सिंह का नाम शाहाबाद में विकास पुरुष के रूप में लिया जाता था। पूर्व आईएएस से अवकाश ग्रहण के बाद भाजपा में सम्मिलित हुए और आरा संसदीय सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े और विजय हासिल की। केंद्रीय विद्युत मंत्री के रूप में काफी चर्चित हुए साथ ही भोजपुरी के विकास में कई उल्लेखनीय कार्य किया। विगत एमपी के चुनाव में सुदामा प्रसाद से हार गए और इसका भी ठीकरा पार्टी के कार्यकर्ताओं वर्तमान एमएलए और एमपी पर भीतर घात कर हरवाने का आरोप लगाया। कुछ दिन पूर्व बिजली विभाग में करोड़ों का घपला का मामला उठाया।
इस प्रकार की बातें पार्टी, बड़े नेताओं को अच्छा नहीं लगा लेकिन चुनाव के कारण सभी चुप रहे। बिहार विधानसभा का चुनाव परिणाम आते ही आर के सिंह पर कार्रवाई की गई और 6 वर्षों के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।
आरके सिंह को अपने ही पार्टी का विरोध करने पर पार्टी से 6 साल के निष्कासित कर दिया है।आर.के. सिंह ने चुनाव से पहले कई बार ऐसे बयान दिए जिससे पार्टी को असहज स्थिति में आना पड़ा।उन्होंने NDA के कई उम्मीदवारों पर सवाल उठाए. इतना ही नहीं, उन्होंने बिहार में कथित बिजली घोटाले का आरोप लगाकर नीतीश सरकार को भी निशाने पर लिया था।उन्होंने डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, जेडीयू के अनंत सिंह और आरजेडी के सूरजभान सिंह पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि ऐसे लोगों को वोट देने से अच्छा है चुल्लू भर पानी में डूब मर जाना चाहिए। भीतर घात वाली घटना से चर्चित नेताओं का नाम लेकर को वोट न देने की अपील से अनेक नेता नाराज चल रहे थे।
