
RKTV NEWS/देवघर (झारखंड)13 नवंबर।उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी नमन प्रियेश लकड़ा के निर्देशानुसार स्वास्थ्य विभाग द्वारा बुधवार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों — एनपीपीसीडी (राष्ट्रीय बहरेपन की रोकथाम और नियंत्रण कार्यक्रम), सांस (Social Awareness and Action to Neutralise Pneumonia Successfully) तथा एनीमिया मुक्त भारत अभियान — पर आधारित एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों, नर्सों,सहिया एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को इन महत्वपूर्ण जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों की कार्यप्रणाली, लक्ष्यों और जन-जागरूकता रणनीतियों से प्रशिक्षित करना था ताकि स्वास्थ्य सेवाएं गांव-गांव तक प्रभावी रूप से पहुंच सकें।
कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यशाला का शुभारंभ सिविल सर्जन डॉ जुगल किशोर चौधरी द्वारा किया गया। अपने संबोधन में कहा कि भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे इन तीनों कार्यक्रमों का उद्देश्य “स्वस्थ भारत” के संकल्प को साकार करना है। उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों से आग्रह किया कि वे प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान को जमीनी स्तर पर लागू करें ताकि इन अभियानों का लाभ हर नागरिक तक पहुंचे।
कार्यक्रम की प्रमुख बातें
1. एनपीपीसीडी (National Programme for Prevention and Control of Deafness):
विशेषज्ञों ने बताया कि भारत में श्रवण हानि की समस्या बढ़ती जा रही है। इस कार्यक्रम के तहत नवजात शिशुओं से लेकर वृद्धजनों तक के कानों की जांच, सुनने की क्षमता की स्क्रीनिंग और समय पर उपचार पर बल दिया गया। कार्यशाला में ओटोलॉजिस्ट एवं ईएनटी विशेषज्ञों ने सुनने की मशीनों, ईयर केयर और रोकथाम उपायों पर भी व्यावहारिक जानकारी दी।
2. सांस (Social Awareness and Action to Neutralise Pneumonia Successfully):
प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में निमोनिया मृत्यु का प्रमुख कारण है। सांस अभियान का उद्देश्य समय पर पहचान, त्वरित उपचार और रोकथाम के माध्यम से बच्चों की जान बचाना है। आशा कार्यकर्ताओं को बताया गया कि शिशुओं में तेज सांस चलना, सीने में धड़कन या खांसी जैसे लक्षण दिखने पर तत्काल चिकित्सीय सहायता कैसे उपलब्ध कराई जाए।
3. एनीमिया मुक्त भारत (Anemia Mukt Bharat):
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बताया कि एनीमिया न केवल महिलाओं और किशोरियों में बल्कि बच्चों और पुरुषों में भी व्यापक रूप से पाई जाती है। प्रशिक्षण में आयरन-फोलिक एसिड (IFA) टैबलेट वितरण, संतुलित आहार, हरी पत्तेदार सब्जियों, दालों एवं खून बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों के सेवन के महत्व पर जोर दिया गया
जिला कार्यक्रम समन्वयक प्रवीण सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की यह पहल ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में जन-जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
इन तीनों कार्यक्रमों का समन्वित लक्ष्य है — “स्वस्थ बचपन, सक्षम युवावस्था और सशक्त मातृत्व।”
प्रशिक्षण की गतिविधियाँ
कार्यशाला में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को पोस्टर, ऑडियो-विजुअल प्रस्तुतियों, प्रश्नोत्तरी और समूह चर्चा के माध्यम से प्रशिक्षित किया गया। प्रतिभागियों ने स्वास्थ्य संबंधी विषयों पर व्यावहारिक सत्रों में सक्रिय रूप से भाग लिया।
समापन
स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को अपने-अपने क्षेत्रों में इन कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का संकल्प दिलाया।
इस अवसर पर सीडीपीओ,बीईईओ,बीपी एम,नोडल सी एच्ओ,बी टी टी, ए एन एम,एविडेंस सेक्शन प्रतिनिधि और सहिया साथी आदि उपस्थित थे।
