
भोपाल/मध्यप्रदेश ( मनोज कुमार प्रसाद) 11 नवम्बर।हास्य व्यंग्य की पैनी और चुटीली कविताओं की बौछार और साथ ही समाज में व्याप्त विसंगतियों विद्रूपताओं पर व्यंग्य निबंधों के तीखे प्रहार के साथ शांति- गया साहित्य कला एवं खेल संवर्धन समिति भोपाल द्वारा हिंदी भवन के नरेश मेहता गोष्ठी कक्ष में रवींद्रनाथ टैगोर विश्विद्यालय भोपाल द्वारा आयोजित किए जाने वाले विश्व रंग के पूर्व रंग के अंतर्गत आयोजित गोष्ठियों की श्रृंखला में एक यादगार व्यंग्य कविता एवं व्यंग्य निबंध गोष्ठी सम्पन्न हुई | इस गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार और अध्यक्ष वनमाली सृजन पीठ ने जाति व्यवस्था पर तीखा प्रहार करने वाला व्यंग्य प्रस्तुत किया | गोष्ठी में सारस्वत अतिथि वरिष्ठ व्यंग्यकार सुदर्शन सोनी ने आज वोटो के लिए मुफ्त के रेवड़ी कल्चर पर प्रभावी ढंग से अपनी बात रखी , | कार्यक्रम में मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार राजेंद्र गट्टानी ने समसामयिक विषयों पर तीखे मुक्तक प्रस्तुत किए, |
कार्यक्रम संयोजक संस्था सचिव व्यंग्यकार अरुण अर्णव खरे ने अपनी व्यंग्य कविताओं से श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी, | गोष्ठी के क्रम को आगे बढ़ाया वरिष्ठ व्यंग्यकार कुमार सुरेश ने उन्होंने प्रगति की सीढ़ी के माध्यम से वर्तमान दूषित मानसिक सामाजिक प्रवृत्तियों पर प्रहार किए , इस अवसर पर वरिष्ठ व्यंग्यकार विवेकरंजन श्रीवास्तव ने आधुनिक सोशल मीडिया के हमारे परिवार और समाज में बढ़ते दखल पर अपनी व्यंग्य रचना प्रस्तुत की ,वरिष्ठ व्यंग्यकार गोकुल सोनी ने अपनी व्यंग्य कविता के माध्यम से खूब वाह वाही बटोरी , चमचागिरी की प्रवृत्ति पर करारा प्रहार करते हुए “चमचा” कविता में पढ़ा….
“गर बॉस मुस्करा रहे, ये खिलखिलाएगा/ गर बॉस सीरियस हैं, गम से सिर झुकाएगा/ सुख दुख में दूसरों के ऐसा कौन है करीब/ इस पर तो भारत रत्न का हकदार है चमचा/
सुपरिचित साहित्यकार कांता रॉय ने आज की दूषित राजनीति पर तीखे कटाक्ष किए ,|
वरिष्ठ व्यंग्यकार शारदादयाल श्रीवास्तव ने मौसम के माध्यम से आदमी की व्यथा को अपने व्यंग्य का केंद्र बनाया , सुपरिचित साहित्यकार लक्ष्मीकांत जबणे ने समसामयिक प्रभावी व्यंग्य कविताएं प्रस्तुत की , डॉ गिरजेश सक्सेना ने सेना के बार बार इस्तेमाल पर अपने अनुभव साझा किए |साहित्यकार अशोक धमनियां ने अपने व्यंग्य निबंध का वाचन किया , सुपरिचित साहित्यकार मनीष बादल ने चुटीले दोहे से गोष्ठी को नई ऊंचाइयां प्रदान की, गोष्ठी का संचालन कर रहे,साहित्यकार प्रदीप सक्सेना ने अपनी तीखी व्यंग्य कविताओं से भ्रष्ट व्यवस्था पर तीखे प्रहार किए |
घनश्याम मैथिल अमृत ने अपनी व्यंग्य क्षणिकाएं प्रस्तुत कर गोष्ठी में व्यंग्य को नया रंग दिया | कार्यक्रम के अंत में कांता रॉय ने उपस्थित जनों का आभार प्रकट किया।
