
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)21 जून। शनिवार को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर महाराजा कॉलेज, आरा के पी.जी. भूगोल विभाग द्वारा प्रोफेसर एस.के. सिन्हा स्मृति व्याख्यान श्रृंखला के 15वें एपिसोड का सफल आयोजन किया गया। इस अवसर पर योग विशेषज्ञ बबली राजपूत (नई दिल्ली) मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहीं। उनका व्याख्यान “योग का वैश्वीकरण: एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य की ओर भारत का योगदान”विषय पर आधारित था।जिसमें उन्होंने यह बताया कि कैसे भारत की प्राचीन योग पद्धति आज वैश्विक स्वास्थ्य और सतत विकास की चर्चाओं को नई दिशा दे रही है।विशेषज्ञ बबली ने बताया कि अनुशासित योग दिनचर्या तनाव को कम करती है, रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है, और समग्र रूप से शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य को सुधारती है—इन फायदों को आज आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी मान्यता दे रहा है। उन्होंने योग की यात्रा को भारत की दार्शनिक परंपराओं से लेकर आज 190 से अधिक देशों में इसकी स्वीकार्यता तक का विवरण पी. पी. टी के माध्यम से दिया। संयुक्त राष्ट्र द्वारा योग को दी गई मान्यता, इसके माध्यम से रोगों की रोकथाम, मानसिक स्वास्थ्य सहयोग और वैश्विक शांति में योगदान की बात उन्होंने विस्तार से समझाई।
बबली राजपूत ने यह भी कहा कि योग संयमित उपभोग, संतुलित जीवनशैली और जैव विविधता के प्रति सम्मान जैसे सिद्धांतों को विकसित करता है—जो संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
कार्यक्रम का आरम्भ वेबिनार संयोजक प्रो. संजय कुमार, विभागाध्यक्ष, पी.जी. भूगोल विभाग, महाराजा कॉलेज, आरा ने किया। उन्होंने योग को भूगोल के मानव- पर्यावरण संवाद के संदर्भ में प्रस्तुत किया और मुख्य अतिथि का स्वागत किया। डॉ. द्वीपिका शेखर सिंह ने आयोजन सचिव की भूमिका निभाई और वेबिनार के संचालन के साथ-साथ संवाद सत्र का समन्वय किया।
इस कार्यक्रम में 80 से अधिक छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों और शिक्षकों ने भाग लिया। आज के वेबिनार में प्रमुख प्रतिभागियों में डॉ. उषा कुमारी,डॉ. अभय कुमार मिश्रा महाराजा कॉलेज,डॉ. उदय कुमार(IGNOU, पोर्ट ब्लेयर), डॉ. आशीष कुमार (SCERT, पटना), डॉ. इंदु बाला (मगध विश्वविद्यालय) शामिल रहीं l
