
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)10 नवम्बर।जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान पिरौटा में वन्दे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर सामूहिक गायन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।इस अवसर पर संस्थान के प्राचार्य डॉ. सरिता शर्मा ने कहा कि वंदे मातरम सिर्फ एक गीत नहीं है बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा है। इस वर्ष 7 नवंबर 2025 को भारत के राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। यह एक ऐसी रचना है जिसने स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्र निर्माताओं की अनगिनत पीढ़ियों को प्रेरित किया है। संस्थान की व्याख्याता वन्दना कुमारी ने कहा कि वंदे मातरम का अर्थ है- मैं मां को नमन करता हूँ अर्थात् भारत माता मै तेरी स्तुति करता हूं।इसीलिए इसे भारत माता का गीत भी कहा जाता है। इसमें वंदे संस्कृत भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ नमन करना होता है, वहीं मातरम इंडो-यूरोपीय शब्द है, जिसका मतलब ‘मां’ होता है। संस्थान के व्याख्याता डॉ. अरविंद कुमार ने कहा कि वंदे मातरम मां भारतीयों की साधना है-आराधना है। वंदे मातरम हमें हमारे इतिहास एवं गौरव से परिचित कराता है। इस कार्यक्रम में संस्थान के व्याख्याता सुनील कुमार, ज्योति किरण, रेखा कुमारी, राधा कुमारी, स्मिता कुमारी, डॉ. निधि प्रिया, कोड बकेट से विकास नैन, दिव्या कुमारी, डायट समन्वयक विनीत कुमार सिंह एवं डिजिटल नेट समन्वयक डॉ. हर्षवर्धन के साथ-साथ संस्थान के सभी प्रशिक्षु सम्मिलित हुए।
