उच्च शिक्षा विभाग के मुख्य द्वार पर संगीत विश्वविद्यालय की लगी तस्वीर।

संगीत शिक्षा की जानकारी लेने सुबह से लेकर देर रात तक लगी रही लोगों की भीड़।
खैरागढ़/छत्तीसगढ़ (रवींद्र पांडेय) 6 नवंबर। छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस के 25 वर्ष पूर्ण होने पर छत्तीसगढ़ शासन के द्वारा रजत जयंती का पर्व मनाया गया। इस अवसर पर नवा रायपुर में एक से पांच नवंबर तक विभिन्न विभागों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। इसमें इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय की प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रही। कुलपति प्रो. डॉ. लवली शर्मा के निर्देशन तथा मार्गदर्शन में उक्त पांच दिवसीय प्रदर्शनी में विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों द्वारा विभिन्न कलाओं का बेहतर प्रदर्शन किया गया। सुबह से लेकर देर रात तक प्रदर्शनी में लोगों की भीड़ लगी रही और विभिन्न कलाओं को जानने तथा समझने के लिए लोगों ने अपनी रुचि जाहिर की। खास बात यह रही कि उच्च शिक्षा विभाग की इस प्रदर्शनी के मुख्य द्वार पर इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय की तस्वीर मुख्य आकर्षण का केंद्र रही। संगीत विश्वविद्यालय की तस्वीर को देखते ही लोग आकर्षित होकर कला के संबंध में जानकारी लेने पहुंचते रहे।
उच्च शिक्षा विभाग के मंत्री टंकराम वर्मा सहित जनप्रतिनिधियों ने भी प्रदर्शनी का आनंद लिया और इसकी सराहना की। प्रदर्शनी के संयोजक योग निदेशक डॉ. अजय पांडेय तथा सहसंयोजक सहायक प्राध्यापक डॉ. विकास चंद्रा रहे। सहयोगी के रूप में मूर्तिकला के छात्र पोडियम रवि एवं चित्रकला के छात्र गिरीश उपस्थित रहे।
खैरागढ़ की प्रदर्शनी में संगीत कला की शिक्षा लेने लोगों को किया गया जागरूक
कुलपति डॉ. लवली शर्मा के निर्देशन में खैरागढ़ जिला मुख्यालय में आयोजित तीन दिवसीय कला प्रदर्शनी में भी जनप्रतिनिधियों सहित आम नागरिकों ने रुचि ली। इस दौरान दृश्यकला संकाय के अंतर्गत चित्रकला, मूर्तिकला, छापाकला, क्राफ्ट एवं डिजाइन विभाग द्वारा विभिन्न कलाओं की प्रदर्शनी लगाई गई थी। नगर सहित आसपास के गांवों से पहुंचे लोगों विशेषकर युवाओं को संगीत एवं ललित कलाओं की जानकारी देते हुए इनके अकादमिक महत्व व प्रभाव पर प्रकाश डाला गया। इन कलाओं के द्वारा कौशल विकास की शिक्षा के प्रति जागरण के लिए भी विशेष प्रयास किया गया।
प्रदर्शनी में रखी विभिन्न प्रकार की मूर्तियां तथा चित्रकला लोगों को इस तरह पसंद आई कि सोशल मीडिया में भी इन कलाओं की चर्चा होती रही। खैरागढ़ की इस प्रदर्शनी के संयोजक सहायक प्राध्यापक डॉ. रबीनारायण गुप्ता तथा सह-संयोजक सहायक प्राध्यापक संदीप किंडो रहे। सहयोगी के रूप में सहायक प्राध्यापक डॉ. कपिल वर्मा व डॉ. छगेंद्र उसेंडी, अतिथि व्याख्याता मनिंदर सिंह, उमेश नेताम व केशव ध्रुव उपस्थित रहे।

