
RKTV NEWS/नई दिल्ली 04 नवम्बर।जामिया मिलिया इस्लामिया के 105वें स्थापना दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय के मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण प्रकोष्ठ (Mental Health and Wellness Cell) की ओर से “मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण” विषय पर एक संवेदनशीलता आधारित कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों और कर्मचारियों के बीच मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और समझ को बढ़ावा देना था।
कार्यक्रम की शुरुआत कुरआन की तिलावत और जामिया तराना से हुई। प्रकोष्ठ के अध्यक्ष प्रोफेसर जुबैर मीनाई ने मुख्य अतिथि प्रोफेसर पंकज अरोड़ा, अध्यक्ष राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE), तथा संसाधन विशेषज्ञों प्रोफेसर नीमेश देसाई, पूर्व निदेशक आईएचबीएएस (Institute of Human Behaviour and Allied Sciences), और डॉ. राजेश कुमार, सोसाइटी फॉर द प्रमोशन ऑफ यूथ एंड मासेस (SPYM) का स्वागत किया।
प्रोफेसर मीनाई ने प्रकोष्ठ के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए इसके सदस्यों — प्रोफेसर समीना बानो, प्रोफेसर सारिका शर्मा, डॉ. मोहम्मद फैज़ुल्लाह खान, डॉ. सबा महमूद बशीर और डॉ. इरशाद नक़वी — का परिचय कराया। उन्होंने बताया कि यह प्रकोष्ठ सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और उम्मीद (UMMEED) ड्राफ्ट गाइडलाइंस के अनुरूप विश्वविद्यालय में एक समग्र मानसिक स्वास्थ्य नीति लागू करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है।
स्वागत भाषण में रजिस्ट्रार प्रोफेसर मोहम्मद मेहताब आलम रिज़वी ने मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर बल देते हुए कहा कि तनाव (Stress) जीवन का हिस्सा है, लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि हम इसका सामना किस तरह करते हैं।
मुख्य अतिथि प्रोफेसर पंकज अरोड़ा ने भावनात्मक स्थिरता (Emotional Stability) पर अपने विचार रखते हुए कहा कि आज भी मानसिक बीमारियों को समाज में वर्जित विषय (Taboo) के रूप में देखा जाता है। उन्होंने दूसरों की बात सहानुभूति और धैर्यपूर्वक सुनने के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
कुलपति प्रोफेसर मज़हर आसिफ ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा कि अनुशासन, विनम्रता और संबंधों की सुंदरता को बनाए रखना एक शांतिपूर्ण जीवन की कुंजी है।
कार्यशाला में दो प्रमुख सत्र आयोजित किए गए। पहले सत्र में प्रोफेसर नीमेश देसाई ने “Mad, Sad, Bad” की अवधारणा को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाते हुए मानसिक स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। दूसरे सत्र में डॉ. राजेश कुमार ने मादक पदार्थों के सेवन (Substance Abuse) पर पावरपॉइंट प्रस्तुति दी और दो लघु फिल्में प्रदर्शित कीं। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं — खासकर लड़कियों — पर इसके प्रभाव और इससे जुड़े सामाजिक कलंक पर प्रकाश डाला।
लगभग 150 विद्यार्थियों ने इस कार्यशाला में उत्साहपूर्वक भाग लिया और विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम का समापन डॉ. फैज़ुल्लाह खान के धन्यवाद ज्ञापन और राष्ट्रीय गान के साथ हुआ।
यह कार्यशाला जामिया मिलिया इस्लामिया की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है जिसके तहत विश्वविद्यालय एक संवेदनशील, सहयोगी और मानसिक रूप से सशक्त शैक्षणिक वातावरण के निर्माण के लिए निरंतर प्रयासरत है।
