
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)04 नवंबर।प्रथम चरण का मतदान 6नवंबर को होने जा रहा है। मतदान का प्रतिशत बढ़े इसके लिए चुनाव आयोग व जिला प्रशासन सभी साकारात्मक उपाय कर रहा है।एक जागरूक मतदाता से बातचीत कर उनके विचार जनहित में जारी है।शशि मिश्र ने बताया की जैसे-जैसे बिहार विधानसभा चुनाव 2025 नज़दीक आ रहे हैं, पूरे राज्य में राजनीतिक गतिविधियाँ तेज़ हो गई हैं। लेकिन इस चुनावी माहौल के बीच सबसे अहम सवाल यह है कि क्या जनता मतदान को लेकर जागरूक है?“बिहार की जनता लोकतंत्र को जीती है, पर उसे और अधिक जागरूक होकर अपने मत का प्रयोग करना चाहिए।पचास से साठ प्रतिशत मतदान सही नहीं है।जागरूक मतदाता ही लोकतंत्र की असली ताकत है।”
उन्होंने बताया कि बिहार हमेशा से राजनीति का केंद्र रहा है। यहाँ की जनता ने कई बार यह साबित किया है कि वह बदलाव की दिशा तय करने में अग्रणी है। लेकिन आज भी बहुत से लोग मतदान दिवस को केवल छुट्टी के रूप में देखते हैं और आराम फरमाते हैं।अगर हम वोट नहीं करेंगे, तो शिकायत करने का भी अधिकार खो देंगे।
फिर पांच साल रोने,या गाली दे ने का कोई मतलब नहीं है।
मतदान सिर्फ अधिकार नहीं, बल्कि देश और राज्य के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है। शिक्षा स्वास्थ्य और विकास का मार्ग है, युवाओं का भविष्य और संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन है।इस चुनाव में पहली बार वोट देने वाले युवाओं की भूमिका निर्णायक होगी। “युवा केवल दर्शक न बनें, बल्कि लोकतंत्र के सक्रिय सहभागी बनें। यदि युवा वर्ग सही सोच और ईमानदारी के साथ मतदान करे, तो राजनीति की दिशा ही बदल सकती है।” उन्होंने यह भी कहा कि बिहार के गांव-गांव में मतदाता जागरूकता अभियान चलाना समय की जरूरत है, ताकि हर व्यक्ति अपनी भूमिका को समझ सके।
आज बिहार की महिलाएँ हर क्षेत्र में आगे हैं, और अब वे मतदान में भी अपनी उपस्थिति मजबूती से दर्ज करा रही हैं। “महिला मतदाता जब आगे आती हैं, तो समाज में संवेदना, संतुलन और सशक्तिकरण तीनों बढ़ते हैं। उनका एक एक वोट न्यायपूर्ण शासन की नींव रख सकता है।”यहां मेहनती, सजग और विचारशील हैं। अगर यही सजगता मतदान केंद्रों पर दिखाई दे, तो राज्य की राजनीति का स्वरूप बदल सकता है। “जाति या प्रलोभन से ऊपर उठकर अगर लोग बिहार के भविष्य को ध्यान में रखकर वोट दें, तो आने वाला बिहार और भी सशक्त व समृद्ध बन सकता है।इस बार का चुनाव केवल दलों की परीक्षा नहीं, बल्कि नागरिक चेतना की भी परीक्षा है। “लोकतंत्र तभी जीवित रहेगा जब जनता सजग रहेगी। इस चुनाव में बिहार देश के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत कर सकता है कि जागरूक नागरिक ही मजबूत शासन की नींव रखता है।”
बातचीत के क्रम में “हर मतदाता मतदान केंद्र तक पहुँचे। बिहार का भविष्य किसी एक नेता से नहीं, बल्कि हर नागरिक के वोट से तय होगा। लोकतंत्र का यह पर्व केवल राजनीति का नहीं, बल्कि जनचेतना का उत्सव है। आइए हम सभी मिलकर एक सशक्त और जागरूक बिहार बनाएं।
