
RKTV NEWS/दुमका (झारखंड)02 नवंबर।कनिष्ठ पौधा संरक्षण पदाधिकारी, दुमका ने बताया कि धान की फसल को सबसे अधिक नुकसान पहुँचाने वाले कीटों में भूरा माहू प्रमुख है। यह कीट पौधों का रस चूसता है जिससे पौधे पीले पड़कर सूखने लगते हैं, जिसे हॉपर बर्न (Hopper Burn) कहा जाता है। इसके संक्रमण से धान की फसल में राइस रैग्ड स्टंट वायरस एवं राइस ग्रासी स्टंट वायरस जैसी बीमारियाँ भी फैलती हैं, जिससे उत्पादन में भारी कमी आती है।
उन्होंने बताया कि यदि नियंत्रण नहीं किया गया तो यह कीट 70 से 100 प्रतिशत तक नुकसान पहुँचा सकता है।
भूरा माहू की रोकथाम के उपाय
1. प्रतिरोधी किस्मों की रोपाई करना।
भूरा माहू से प्रतिरोधी धान की किस्मों जैसे चंपा, जलाकांति, पानीडुबी जैसे किस्मों की बुवाई करना।
2. 01 सितंबर से लगातार खेतों का निरीक्षण सुनिश्चित करना। इस कीट का आर्थिक क्षति स्तर (ETL) 5-10 कीट/ हिल है।
3. कीट प्रभावित प्रक्षेत्रों से अतिरिक्त सिंचाई जल की निकासी करना।
4. उचित नाइट्रोजन (यूरिया) एवं पोटाश खाद की मात्रा देना सुनिश्चित करें।
5. कीटनाशकों का उपयोग (इसमें से किसी एक का चयन कर सकते हैं)
I. Thiamethoxam 25 WG @2g/10L
II. Imidaclroprid 17.8 SL @ 2.5mL/10L (पौधा संरक्षण केन्द्रों पर उपलब्ध)
III. Triflumezopyrim 10% SC @ 01mL/लीटर पानी
IV. Dinotefuran 15% + Pymetrozine 45% WG @ 6gm/10L
कीटनाशकों का छिड़काव पौधों के निचले भाग में Knapsack Sprayer द्वारा करें तथा प्रति हेक्टेयर क्षेत्र हेतु 500 लीटर घोल तैयार करें।
उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अपने खेतों में नियमित निरीक्षण करें और आवश्यकतानुसार पौधा संरक्षण उपाय अपनाएँ, ताकि धान की फसल को भूरे माहू के प्रकोप से सुरक्षित रखा जा सके।
