
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)02 नवंबर।युवा रिसर्च स्कॉलर फैजान अहमद खां के चकिया आरा आवास पर आगमन की सूचना मिलते ही इष्ट मित्रों ने भेंट कर बधाई और शुभकामना दी। प्रतिभावान पुत्र की प्रगति से पिता,समाजसेवी सरफराज अहमद खां, अवकाश प्राप्त प्रधानाध्यापिका मां साबिहा बानो ,पत्नी,भाई सभी खुश हैं।सबसे पहले पत्रकार डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा एवं रेड क्रॉस की सचिव डॉक्टर विभा कुमारी द्वारा बुके,पेन देकर सम्मानित किया गया। फिर युवा वैज्ञानिक फैजान से रिसर्च के बारे में जानकारी प्राप्त की।
बताते चले की फैजान अहमद खां भोजपुर की मिट्टी के प्रतिभावान 29 वर्षीय रिसर्च स्कॉलर है। उनकी शिक्षा केंद्रीय विद्यालय आरा के प्रथम बैच से ए वन ग्रेड में दसवीं पास की जिसके लिए भारत सरकार से 5हजार का चेक प्राप्त हुआ।इसके बाद अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से भूगर्भ शास्त्र से एमएससी की डिग्री हासिल की। इन्होंने नेट और गेट दोनों निकाल चुके हैं । बीरबल साहनी इंस्टिट्यूट लखनऊ से 5 वर्षों का रिसर्च कर रहे हैं जिसमें अभी 4 साल पूरा हो चुका है। जापान सरकार के बुलावे पर क्योटो विश्वविद्यालय में 2 माह की ट्रेनिंग कर अभी लौटे हैं।रिसर्च के लिए भी भारत सरकार 44हजार महीना दे रही है क्योंकि नेट में पूरे देश में 16वा स्थान प्राप्त किया है।
एक प्रश्न के जवाब में इन्होंने बताया कि मेरा रिसर्च जो चल रहा है उसमें धरती के निर्माण के बाद हवा और पानी में ऑक्सीजन कहां से आया इसका अध्ययन किया जा रहा है। इन्होंने बताया कि जो पहले के समुद्र थे उसकी मिट्टी और बालू पत्थर बन चुके हैं तो इसके भी रासायनिक तत्वों का अध्ययन किया जा रहा है इससे पता चलेगा कि उसे समय तात्कालिक हवा में ऑक्सीजन का क्या लेवल रहा है इसका पता लगाया जा रहा है ,क्षेत्र के हिसाब से ,समय के हिसाब से और अलग-अलग वातावरण के हिसाब से। इन्होंने बताया कि इससे निष्कर्ष निकलेगा कि आगे के दिनों में या भविष्य में क्या होने वाला है इसका अनुमान लगाया जा सकता है। एक प्रश्न के जवाब में इन्होंने बताया कि भूगर्भ शास्त्र के अध्ययन से विद्यार्थी कठिन मानकर कतराते हैं लेकिन यह ऐसा नहीं है। विज्ञान को पढ़ना समझना छात्रहित,देश हित और वैश्विक स्तर पर भी काफी लाभकारी है। इससे विश्व स्तर पर पहचान बनती है। मैं भी एक साइंटिस्ट बनकर देश हित में कार्य करना चाहता हूं यही मेरा ख्वाब है।
