
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)30 अक्टूबर। बुधवार को कृषि विज्ञान केन्द्र, भोजपुर (आरा) में “इनपुट डीलरों के लिए कृषि विस्तार सेवा डिप्लोमा (DAESI)” प्रशिक्षण कार्यक्रम 2025–26 के लिए का शुभारंभ किया गया। सामुहिक दीप प्रज्जवलन से कार्यक्रम का उद्घाटन हुआ।कार्यक्रम का अध्यक्षता कृषि विज्ञान केन्द्र की प्रमुख डॉ. शोभा रानी ने किया । इस अवसर पर नाबार्ड भोजपुर के जिला विकास प्रबंधक , उप परियोजना निदेशक आत्मा भोजपुर, कोर्स प्रभारी डॉ. ए. के. मौर्य, डॉ. सच्चिदानंद सिंह, डॉ. आलोक भारती तथा डॉ. विकास सिंह सहित अन्य अधिकारी एवं प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे। इस 48 सप्ताह की अवधि वाले प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रत्येक बुधवार को कक्षा आयोजित की जाएगी। इसका उद्देश्य इनपुट डीलरों को वैज्ञानिक कृषि तकनीकों, फसल प्रबंधन, उर्वरक व कीटनाशक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, जल संरक्षण, जैविक खेती एवं कृषि उद्यमिता से संबंधित नवीनतम जानकारियों से सशक्त बनाना है ताकि किसानों को अधिक प्रभावी ढंग से सलाह और सहयोग प्रदान कर सकेंगे । कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।
डॉ. शोभा रानी, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान, कृषि विज्ञान केन्द्र, भोजपुर ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि यह प्रशिक्षण भारत सरकार के राष्ट्रीय कृषि विस्तार प्रबंधन संस्थान (MANAGE), हैदराबाद के निर्देशन में आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि “इनपुट डीलर अब सिर्फ व्यापारिक भूमिका में नहीं बल्कि एक ‘कृषि सलाहकार’ के रूप में किसानों को दिशा दिखाने का कार्य करेंगे।” उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम इनपुट डीलरों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाएगा, जिससे वे किसानों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं प्रदान कर सकेंगे इस प्रकार के कार्यक्रम कृषि क्षेत्र में जागरूकता एवं तकनीकी दक्षता को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होंगे। कृषि विज्ञान केन्द्र निरंतर प्रयासरत है कि जिले के किसानों तक नवीनतम वैज्ञानिक तकनीक पहुँचाई जा सके।”
DDM नाबार्ड भोजपुर ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज के समय में कृषि क्षेत्र तेजी से बदल रहा है, ऐसे में इनपुट डीलरों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा, “कृषि केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक समग्र व्यवसाय बन चुका है। यदि डीलर वैज्ञानिक ज्ञान से सुसज्जित होंगे तो किसान समुदाय को सही मार्गदर्शन मिलेगा और क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था सशक्त होगी।”डीपीएमआत्मा भोजपुर ने प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम आत्मा और कृषि विज्ञान केन्द्र के बीच सामंजस्य का उदाहरण है। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रेरित किया कि वे इस प्रशिक्षण के माध्यम से नवीन कृषि तकनीकों को सीखें और किसानों तक पहुँचाएँ। डॉ. ए. के. मौर्य, कोर्स प्रभारी ने प्रशिक्षण की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह 40 सप्ताह का कार्यक्रम सिद्धांत और व्यवहारिक दोनों पहलुओं पर आधारित होगा। उन्होंने कहा, “हर बुधवार को नियमित रूप से प्रशिक्षण आयोजित होगा, जिसमें विशेषज्ञ वैज्ञानिक विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन देंगे। प्रशिक्षण के अंत में सभी प्रतिभागियों को मूल्यांकन के बाद प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा।”डॉ. सच्चिदानंद सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि कृषि का भविष्य ज्ञान पर आधारित है। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि “आप लोग किसानों और विज्ञान के बीच एक कड़ी हैं। यदि आप सही जानकारी देंगे तो उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा।”
डॉ.आलोक भारती ने अपने संबोधन में बताया कि जलवायु परिवर्तन के इस दौर में वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा, “प्रशिक्षण के माध्यम से आप सभी को मृदा स्वास्थ्य, कीट प्रबंधन और फसल विविधीकरण पर व्यवहारिक जानकारी मिलेगी जो भविष्य की टिकाऊ कृषि के लिए अहम है।”
डॉ. विकास सिंह ने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं बल्कि प्रतिभागियों में कृषि उद्यमिता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। उन्होंने कहा कि “आज का इनपुट डीलर एक सामाजिक भूमिका निभा रहा है एवं किसानों को सही सलाह देकर उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।
