
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)17 सितंबर। मंगलवार को महाधरना का पूर्व घोषित कार्यक्रम जयप्रकाश स्मारक स्थल रमना मैदान के पास बड़े पंडाल में आयोजित हुआ। जिसमें सैकड़ो लोगों की बैठने की व्यवस्था की गई थी। इस धरना में चारों जिला के जनप्रतिनिधि प्रबुद्ध लोग और युवा सभी दलों के कार्यकर्ता और प्रतिनिधि उपस्थित रहे। शाहाबाद को कमिश्नरी बनाना और आरा को मुख्यालय इसी मांग को लेकर आंदोलन छोटे रूप में प्रारंभ हुआ लेकिन अभी इसका स्वरूप बढ़ते जा रहा है। यह भी है कि यह मांग सार्वजनिक हित के लिए है सभी जिला वासियों के विकास,शैक्षिक सुधार, आपसी सहयोग, भाईचारा संस्कृत धरोहर को एकता के सूत्र में बांधने का सबसे बड़ा माध्यम है। शाहाबाद को कमिश्नरी बनाने का मांग यह नया नहीं है बल्कि तीन दशक पुराना है और इसके लिए आंदोलन हो चुका है। जब 16 और 18 जिला थे तब से यह मांग उठती रही और पुराना शाहाबाद को केवल तोड़ तोड़ कर छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित कर पुराने शाहाबाद के अस्तित्व को मिटाने का प्रयास होता रहा। राजनीतिक लोग और पार्टियां इसे अपने सत्ता सत्ता पर काबिज होने के लिए तरह-तरह के हाथ कंधे अपनाते रहे और कमिश्नरी की मांग को उलझाए रखा।
इस बात को अनेक वक्ताओं ने खुले रूप से कहा कि अगर राजनीतिक वर्चस्व वाले लोग इसका निदान करना चाहते तो निश्चित रूप से हो गया रहता।अनेक सामाजिक से समाजसेवी कार्यक्रम अन्य को संगठन से जुड़े लोग इस कार्यक्रम को खुले रूप से सहयोग और अपना समर्थन दिया जिससे लगता है कि यह आंदोलन रुकेगा नहीं अपितु निर्णय तक पहुंचाने के लिए तैयार है। ऐसा एक भी कार्यकर्ता या वक्त नहीं मिला जो इस बात का विरोध या किसी प्रकार का खंडन किया हो जो शुभ संकेत है आज आने वाले समय के लिए संगठन और मजबूत होगा। संयोजक धीरेंद्र प्रसाद सिंह से लेकर टीम के सभी सदस्य सक्रियता से लग रहे और अपनी बातों से उपस्थित जन समूह से तालियां बजवाते रहे।
श्री सिंह ने बताया करो या मरो आंदोलन करने को संघर्ष समिति वाद्य हो जाएगी अगर यह मांग पूरी नहीं होती है तो। शाहाबाद के पुराने चार जिला भोजपुर बक्सर कैमूर एवं रोहतास कमिश्नरी बनने की सारी शर्तें पूरा कर रहा है । अनेक प्रमुख कार्यालय आज भी कार्य कर रहे हैं जिसे देखा जा सकता है। जन्म प्रतिनिधियों का नकारात्मक रुझान सभी कार्यकर्ताओं के दिल दिमाग पर बैठ रहा है,अधिकांश कार्यकर्ताओं का मानना है कि
जनप्रतिनिधियों का भी खुलकर विरोध करना पड़ेगा। निकट में विधानसभा चुनाव भी है। कमिश्नरी का ना बनना राजनेताओं को भी भारी पड़ सकता है। प्रमुख उपस्थिति में भाई ब्रह्मेश्वर, अवधेश कुमार पांडेय, रामकुमार सिंह, अशोक कुमार मिश्रा, डॉ जितेंद्र शुक्ला ,यशवंत नारायण, छोटू सिंह, चंदन तिवारी, अभय विश्वास भट्ट ,डॉ राज पांडे , प्रो दिवाकर पांडे देवेंद्र प्रसाद अधिवक्ता प्रो नीरज सिंह अशोक मानव निर्मल सिंह शक्रवार, विद्वान अधिवक्ता गण, प्रोफेसर, मिडिया कर्मी, आदि अपनी बातों को रखा और समर्थन दिया साथी चरणबद्ध तरीके से चलने के लिए सुझाव भी दिया।
