बिहार सरस मेले में कर चुकी है लाखों की बिक्री।

रंग – बिरंगी हस्त निर्मित डालियों से पटा है मेला परिसर।

दो दिनों में महिला उद्यमियों ने किया 50 लाख रुपए से ऊपर का व्यवसाय।

देश के 22 राज्यों से स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिला उद्यमियों ने लगाए है स्टाल।

युवा पीढ़ियों को भी आकर्षित कर रहा सरस मेला,देश के विभिन्न राज्यों के शिल्पों और कलाओं से हो रहे रूबरू।

देशी परिधानों के प्रति महिलाओं का दिखा रुझान।
RKTV NEWS/पटना (बिहार )14 सितंबर ।ज्ञान भवन, पटना में हस्तशिल्प और सदियों पुरानी कलाओं तथा देशी व्यंजनों का मेला लगा हुआ है।जिसे सरस मेला के नाम से जाना जाता है।इस मेला की सबसे बड़ी खासियत यह है कि हर उम्र , हर वर्ग और हर समाज के लोगों की पसंद के उत्पाद एवं व्यंजन खरीद-बिक्री के लिए उपलब्ध हैं।सरस मेला में आकर युवा पीढ़ी अपनी वर्षों पुरानी संस्कृति, लोककला, शिल्प, एवं व्यंजन से रूबरू हो रही हैं वहीँ बुजुर्ग अपने समय के शिल्प को पाकर हर्षित हो रहे हैं। बच्चों को खिलौने सहज ही लुभा रहे हैं।आयुर्वेदिक आचार, आयुर्वेदिक पौधे , आयुर्वेदिक लड्डू और पाचन को दुरुस्त रहने वाले पाचक आगंयुकों की पहली पसब बने हुए हैं l वहीँ खादी, सिल्क और सूती कपड़े और उससे बने परिधान आकर्षक के खास केंद्र हैं l इन उत्पादों की खूब बिक्री हो रही है l जीविका दीदी की रसोई पर देशी , पौष्टिक एवं स्वादिष्ट व्यंजन उपलब्ध हैं।इसके साथ ही कई स्टॉल पर मशहूर मिठाईयां एवं सुस्वादु खाद्य पदार्थ उपलब्ध हैं। शिल्प ग्राम के स्टॉल पर देशी परिधान एवं मधुग्राम के स्टॉल पर शुद्ध मधु प्रदर्शनी सह बिक्री के लिए रखे गए हैं।
बिहार सरस मेला ग्रामीण विकास विभाग के तत्वाधान में जीविका द्वारा 21 सितम्बर 2025 तक आयोजित है। यह मेला प्रति वर्ष सितंबर और दिसंबर माह में आयोजित होता है l जहाँ हमारे देश के विभिन्न राज्यों की लोक संस्कृति, लोककला , हस्तशिल्प और वहां के महशूर व्यंजनों की प्रदर्शनी सह खरीद-बिक्री होती है l साथ ही सतत जीविकोपार्जन योजना समेत सरकार द्वारा संचालित अन्य योजनाओं से लाभान्वित हुई महिलाओं द्वारा निर्मित शिल्प और व्यंजनों की बिक्री होती है l
12 सितम्बर 2025 से जारी सरस मेला से दो दिन में 50 लाख से अधिक के उत्पादों एवं व्यंजनों की खरीद-बिक्री हुई है l आयोजन के दुसरे दिन 13 सितम्बर को लगभग 34 लाख 22 हजार रुपये के उत्पादों की खरीद –बिक्री हुई l 28 हजार से अधिक लोग आये l रविवार 14 सितम्बर को भी बड़ी संख्या में लोग आये और खरीददारी की साथ ही देशी व्यंजनों का परिवार संघ लुत्फ़ उठाया l मेला सुबह 10 बजे से शाम 8 बजे तक संचालित हैं l प्रवेश नि:शुल्क है l सभी स्टॉल पर कैशलेश खरीददारी की सुविधा उपलब्ध है l
सरस मेला में बिहार समेत 22 राज्यों की स्वयं सहायता समूह से जुडी ग्रामीण महिला उद्यमी अपने –अपने प्रदेश के हस्तशिल्प के तहत निर्मित उत्पादों और व्यंजनों को लेकर आई हैं l घर और दुकान सजाने से लेकर बिछावन , कपडे, कवर, कालीन , गुलदस्ते , क्रत्रिम फूल , सिक्की, सीप , बांस , बालू आदि से बने उत्पाद आदि खूब बिक रहे हैं l कतरनी चुडा , सत्तू, बेसन , मडुआ समेत कई प्रकार का आटा , कई प्रकार के आचार और भी बहुत कुछ उपलब्ध है l ये सब 130 स्टॉल पर सुसज्जित हैं l
सरस मेला में शिरकत करने आई ग्रामीण महिला उद्यमियों ने अपने हुनर को रास्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित किया है l जो चूड़ी महिलाओं के सोलह श्रृंगार तक सीमित थी उसे स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने ग्रामीण स्तर पर सूक्ष्म उद्योग का दर्जा दिलाया है l सरस मेला में बिहार के शिवहर जिले से आई आमना खातून आला हजरत जीविका स्वयं सहायता समूह से वर्ष 2018 से जुडी हैं l ससुराल में आर्थिक तंगी का सामना कर रही आमना खातून ने समूह से ऋण लेकर लाह से चूड़ी निर्माण एवं बिक्री का कार्य शुरू किया l सुबह -शाम वो फेरी लगाकर चूड़ियाँ बेचती थी लेकिन अब एक कुशल उद्यमी बन गयी हैं l उन्होंने कई लोगों को रोजगार भी उपलब्ध कराया है l उन्होंने चार लोगों को चूड़ी बेचने और चार महिलाओं को चूड़ी निर्माण के लिए अपने साथ जोड़ लिया है l अब प्रति माह उन्हें 15 से 20 हजार रुपये का मुनाफ़ा हो रहा है l सरस मेला में आमना खातून तीसरी बार आई हैं l इससे पूर्व पिछले साल ज्ञान भवन में आयोजित बिहार सरस में 1 लाख 30 हजार रुपये की चूड़ियों की बिक्री की l दिसंबर माह में आयोजित बिहार सरस मेला में उन्होंने डेढ़ लाख से अधिक की चूड़ियों की बिक्री की l अब उनकी पहचान कुशल महिला उद्यमी के तौर पर अपने जिले में है l लिहाजा वो सरस मेला में अपने शिवहर जिला से ग्रामीण उद्यमी के तौर पर शिरकत कर रही हैं l आमना खातून की कहानी फर्श से अर्श तक के सफ़र जैसी है और सरस मेला में आई देश भर की ग्रामीण महिलाओं की उद्यमी बनने की कहानी काफी प्रेरणादायक है l उनके स्टॉल पर आये आगंतुक उनकी संघर्ष एवं सफलता की कहानी सुनकर आश्चर्यचकित हुए बगैर नहीं रहते l लिहाजा बिहार सरस मेला संघर्ष, सफलता और सदियों पुरानी शिल्प और ग्रामीण उद्यमिता को प्रोत्साहन दते हुए परिलक्षित है l

